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Rishikesh News: तीन घंटे में मरीज के कंधे से निकाला साढ़े छह किलो का ट्यूमर

Thu, 21 Mar 2024 01:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 21 Mar 2024 01:21 AM IST
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Six and a half kilo tumor removed from patient's shoulder in three hours
एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक मरीज के कंधे से 45 सेमी लंबा और करीब साढ़े छह किलो भारी ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है। मरीज अब स्वस्थ है और अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया है।
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला के मोहम्मद सादिकपुर निवासी 37 वर्षीय मरीज की पीठ के ऊपरी हिस्से व कंधे के निकट एक गांठ (साॅफ्ट टिश्यू सार्कोमा) बन गई थी। कुछ समय बाद इस गांठ में रक्तस्राव के साथ घाव बनने लगा। यह मरीज पहली बार जून 2022 में एम्स आया था। लेकिन फॉलोअप में नियमित तौर से एम्स नहीं आ पाया। इसके दो साल बाद फरवरी 2024 में एम्स की सर्जिकल ऑन्कोलाॅजी विभाग की ओपीडी में आकर मरीज ने अपनी परेशानी बताई।
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इन दो वर्षों के दौरान मरीज के कंधे की गांठ का आकर बहुत बढ़ गया था। जिसकी वजह से उसके हाथ और कंधे ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। डाॅक्टरों ने मरीज की जांच की। जिसमें उसकी पीठ में कैंसर बन चुका था और उसका आकार असामान्य रूप से बड़ा हो रहा था।
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सर्जिकल ऑन्कोलाॅजी विभाग के सर्जन डाॅ. अमित गुप्ता ने बताया कि मरीज समय रहते एम्स नहीं पहुंचता तो यह बीमारी उसके शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकती थी। बताया कि ट्यूमर का आकार बड़ा होने के कारण कंधे के आसपास की महत्वपूर्ण नसों, मांसपेशियों व हड्डियों को बचा कर ऑपरेशन करना चुनौतीपूर्ण था।



डॉ. गुप्ता ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज के कंधे का मूवमेंट सामान्य हो गया है और उसे अब दर्द से भी राहत है। इस सर्जरी में लगभग तीन घंटे का समय लगा। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने सर्जरी करने वाले डाॅक्टरों की टीम की प्रशंसा की। सर्जरी टीम में डाॅ. अमित गुप्ता के अलावा डाॅ. मरेश्वनरी, डॉ. निर्भय, डाॅ. अजित और डाॅ. विवेक शामिल थे। जबकि एनेस्थेसिया टीम में डाॅ. भावना गुप्ता, डाॅ. केदार और डाॅ. राधेश्याम का सहयोग रहा।





सप्ताह में तीन दिन ओपीडी

डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि एम्स में सर्जिकल ऑन्कोकोलॉजी विभाग की ओपीडी प्रत्येक मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होती है। एम्स में सभी प्रकार के कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।











कैंसर के इलाज में देरी करने पर यह बहुत घातक होने लगता है। इसलिए जरूरी है कि चिकित्सीय परामर्श के अनुसार रोगी को नियमित स्तर पर फाॅलोअप के लिए अस्पताल आना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज को बीच में छोड़ना हमेशा नुकसानदायक होता है। प्रत्येक कैंसर जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसके लक्षणों के प्रति जागरूक रहकर समयबद्ध इलाज करवाकर इससे जीता जा सकता है। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश
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