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Rishikesh News: 1955 से संस्कृति की संवाहक बनी हुई है सुभाष बनखंडी की रामलीला

Fri, 22 Sep 2023 11:58 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 22 Sep 2023 11:58 PM IST
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Shri Ramlila held in Bankhandi under Municipal Corporation
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चेला चेतराम, होरीलाल, प्रवीण, मंशाराम और बनवारी लाल की थी मंचन की शुरुआत
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नगर निगम अंतर्गत बनखंडी में होने वाली श्री रामलीला कई वर्षों से संस्कृति की ध्वजवाहक बनी हुई है। पात्रों के जीवंत मंचन और स्थानीय निवासियों की रुचि से रामलीला का आयोजन वर्ष हर भव्यता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। शुरूआती दौर में रही संसाधनों की कमी वर्तमान में दिखाई नहीं देेती है। शहर के दानदाता बढ़चढ़कर रामलीला कमेटी को हर संभव मदद को तत्पर रहते हैं।



वर्ष 1995 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. चेला चेतराम, स्व. होरीलाल शर्मा, स्व. प्रवीण, स्व. मंशीराम शर्मा और स्व. बनवारी लाल ने रामलीला मंचन की नींव रखी थी। तब से अब तक अनवरत रामलीला का आयोजन होता आ रहा है। इस बार 12 अक्तूबर से आयोजित रामलीला की 63 वीं पुनरावृत्ति होने जा रही है। श्रीरामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी के अध्यक्ष विनोद पाल और महामंत्री हरीश तिवाड़ी अपनी टीम के साथ आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं।
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कमेटी के महामंत्री हरीश तिवाड़ी ने बताया कि वर्ष 1955 से आज तक सिर्फ तीन बार आयोजन का क्रम टूटा है। इसके तहत पहली बार भारत और चीन युद्ध के समय वर्ष 1662, रामलीला कमेटी के संस्थापक स्व. चेला चेतराम के 1984 में देहांत और 1971 में भारत-पाक के युद्ध के दौरान मंचन नहीं हो पाया था। इसके अलावा कोरोनाकाल के कारण वर्ष 2020-21 में नहीं हुई। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष रामलीला श्रीराम के जीवन चरित्र को प्रस्तुत करती आ रही हैं।
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उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में बल्लियों और बांस के सहारे मिट्टी का कच्चा स्टेज तैयार कर इसका मंचन किया जाता था। वर्तमान में पक्का स्टेज बन चुका है। इसके अलावा कलाकारों के लिए उच्च स्तरीय मेकअप, ड्रेसिंग रूम की भी व्यवस्था है। करीब 12 वर्ष पूर्व नई कमेटी का गठन हुआ।




क्यों प्रसिद्ध है बनखंडी की रामलीला



सुभाष नगर बनखंडी की रामलीला प्रदेशभर में अपना अलग ही महत्व रखती है। महामंत्री हरीश तिवाड़ी ने बताया कि बदलते दौर के साथ रामलीला में आधुनिकता जरूर आई है। मगर, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि इसका मौलिक स्वरूप न बदल सके। इसके लिए आज भी दोहा, छंद, सोरठा, चौपाई और रागिनियों पर मंचन के लिए कलाकारों को तैयारी करवाई जाती है। इसके लिए कलाकारों को विशेष रूप से रामलीला शुरू होने से एक महीने पूर्व प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा सुभाष नगर बनखंडी की रामलीला से जुड़े पुराने कलाकार भी हैं जो मंच पर प्रस्तुति देने के लिए आज पूरे उत्साह में नजर आते हैं। ऐसे कलाकारों में रोहताश पाल भी शामिल हैं जो करीब 45 वर्षों से रामलीला मंचन में सक्रिय हैं। इसी तरह हुकुम चंद 45 जबकि रामरूप 35 वर्षों से रामलीला मंचन की बुनियाद बने हुए हैं। जमाना जाहे जितना आधुनिकता की कैद में आ गया हो लेकिन वरिष्ठ कलाकारों में मंचन को लेकर ललक में लेश मात्र भी कमी नहीं आई है।
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