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आध्यात्म के साथ वैज्ञानिक ज्ञान का स्रोत है संस्कृत

Thu, 25 Nov 2021 01:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 01:09 AM IST
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Sanskrit is the source of scientific knowledge along with spirituality
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तराखंड की ओर से संस्कृत साहित्य में विज्ञान विषय पर जयराम आश्रम के ऑडिटोरियम में दो दिवसीय अखिल भारतीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आठ राज्यों के ग्यारह विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।
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बुधवार को संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुलपति ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान की भूमि रहा है। यहां ज्ञान की गंगा वैदिक काल से बहती चली आ रही है। वेद शब्द का अर्थ ज्ञान होता है। भारत प्राचीनकाल से ही वेद अर्थात ज्ञान का उपासक रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय यहां अपार ज्ञान के केंद्र रहे हैं। एनसीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक डॉ. आरडी शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा को वर्तमान समय में रोजगार से जोड़े जाने की आवश्यकता है। जिससे नईं पीढ़ी का संस्कृत विषय के प्रति रुझान बढ़ेगा। संस्कृत विषय को प्रोत्साहित तथा इसमें निहित ज्ञान के प्रसार के लिए अनुवादकों को भी प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। गोष्ठी में विभागाध्यक्ष पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान विभाग के प्रदीप रावत, डॉ. शशिशेखर मिश्रा, डॉ. उषा कटियार, डॉ. मुस्तफीजुर्रहमान, सुनीलकुमार रतूड़ी, डॉ. पतंजलि मिश्र, डॉ. साधना डिमरी, संतोष तिवारी, आरती सिन्हा, डॉ. प्रकाश पंत, डॉ. आरती जैन, कार्तिक शर्मा, डॉ. हरिशंकर डिमरी आदि थे।
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