ऋषिकेश। भरत विहार में आयोजित रामलीला में नौवें दिन कलाकारों ने सीता हरण का मंचन किया। कलाकारों की ओर से इस प्रसंग का मंचन देख दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
श्री भरत रामलीला दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में कलाकारों ने सीता स्वयंबर का मंचन किया। लंकापति रावत अपनी बहिन सूर्पणनखा के नाक काटने का बदला लेने के लिए पंचवटी पहुंचता है। राम, लक्ष्मण कुटिया से दूर जाए इसके लिए वह मारीच के पास जाकर उसे स्वर्णमृग बनने को कहता है। मारीच स्वर्णमृग का वेश बनाकर माता सीता की कुटिया के आसपास विचरण करने लगता है। स्वर्णमृग देख मां सीता उस पर आकर्षित हो जाती हैं। वह अपने पति राम को स्वर्णमृग को पकड़ने का आग्रह करती हैं। सीता के कहने पर राम स्वर्णमृग को पकड़ने के लिए जंगल की ओर निकल जाते हैं। अनहोनी की आशंका के चलते सीता अपने देवर लक्ष्मण को भी पति की खोज में भेजती हैं। दोनों कुटिया से बाहर जाते ही रावण ब्राह्मण का वेश बनाकर सीता से भीक्षा मांगने आता है। सीता जैसे ही ब्राह्मण को भीक्षा देने के लिए आती हैं। रावण उनका छल से हरण कर लंका ले जाता है। इस मौके पर कुंवरपाल प्रजापति, महेश कुमार प्रजापति, मित्रपाल प्रजापति, विजयकुमार गोस्वामी, सागर गोला आदि शामिल रहे।