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अंगदान कर बचा सकते हैं जरूरतमंदों की जान : प्रो. मीनू
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Iएम्स में यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग ने अंगदान के प्रति जागरूक किया
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Iरंगोली प्रदर्शनी से दिया जीवनदान का संदेशI
एम्स में यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से गुर्दा प्रत्यारोपण और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए रंगोली प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने अंगदान और गुर्दा प्रत्यारोपण से जरूरतमंदों को जीवनदान देने का संदेश दिया।
सोमवार को कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने विविध रंगों एवं कलाकृतियों के जरिए अंगदान, महादान व जीवनदान का जीवंत संदेश दिया। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि एम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू हो चुका है। जिसके तहत अब तक संस्थान के यूरोलॉजी व नेफ्रोलॉजी विभाग के समन्वय में दो मरीजों को सफलतापूर्वक गुर्दा प्रत्यारोपित किया जा चुका है। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा सूचनात्मक सत्र रहा। जिसका उद्देश्य अंगदान से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करना है। यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञों ने अमूल्य जीवन के संरक्षण पर जोर दिया।
विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी डॉ. शैरोन कंडारी ने बताया कि अंगदान के संकल्प से ही हम जरूरतमंद व्यक्ति को नवजीवन दे सकते हैं। इसे मुहिम का हिस्सा बनाने के लिए पैन इंडिया मोहन फाउंडेशन की ओर से अखिल भारतीय स्तर पर पहल की गई है। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी कालिया, यूरोलॉजी विभाग के प्रो. एके मंडल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. निर्झर राज, डॉ. वंदना धींगरा, नर्सिंग कॉलेज फैकल्टी जेवियर वैल्सीयाल, मोहन फाउंडेशन के काउंसलर संचित अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
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Iप्रत्येक रंगोली ने दिया प्रेरक संदेशI
एक रंगोली के माध्यम से संदेश दिया गया कि एक व्यक्ति के अंगदान से आठ जिंदगियों को बचाया जा सकता है। दूसरी रंगोली के जरिए हमें जीवित अवस्था में अपने अंग दान करने को प्रेरित किया गया। एक अन्य रंगोली में संदेश दिया कि यदि किसी मनुष्य को किडनी की बीमारी है तो पारिवारिक सदस्य को अपनी एक किडनी दान कर सकता है। इससे दान देने वाले की जीवन अथवा स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
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Iरंगोली प्रदर्शनी से दिया जीवनदान का संदेशI
एम्स में यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से गुर्दा प्रत्यारोपण और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए रंगोली प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने अंगदान और गुर्दा प्रत्यारोपण से जरूरतमंदों को जीवनदान देने का संदेश दिया।
सोमवार को कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने विविध रंगों एवं कलाकृतियों के जरिए अंगदान, महादान व जीवनदान का जीवंत संदेश दिया। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि एम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू हो चुका है। जिसके तहत अब तक संस्थान के यूरोलॉजी व नेफ्रोलॉजी विभाग के समन्वय में दो मरीजों को सफलतापूर्वक गुर्दा प्रत्यारोपित किया जा चुका है। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल ने बताया कि इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा सूचनात्मक सत्र रहा। जिसका उद्देश्य अंगदान से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करना है। यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञों ने अमूल्य जीवन के संरक्षण पर जोर दिया।
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विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी डॉ. शैरोन कंडारी ने बताया कि अंगदान के संकल्प से ही हम जरूरतमंद व्यक्ति को नवजीवन दे सकते हैं। इसे मुहिम का हिस्सा बनाने के लिए पैन इंडिया मोहन फाउंडेशन की ओर से अखिल भारतीय स्तर पर पहल की गई है। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी कालिया, यूरोलॉजी विभाग के प्रो. एके मंडल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. निर्झर राज, डॉ. वंदना धींगरा, नर्सिंग कॉलेज फैकल्टी जेवियर वैल्सीयाल, मोहन फाउंडेशन के काउंसलर संचित अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
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Iप्रत्येक रंगोली ने दिया प्रेरक संदेशI
एक रंगोली के माध्यम से संदेश दिया गया कि एक व्यक्ति के अंगदान से आठ जिंदगियों को बचाया जा सकता है। दूसरी रंगोली के जरिए हमें जीवित अवस्था में अपने अंग दान करने को प्रेरित किया गया। एक अन्य रंगोली में संदेश दिया कि यदि किसी मनुष्य को किडनी की बीमारी है तो पारिवारिक सदस्य को अपनी एक किडनी दान कर सकता है। इससे दान देने वाले की जीवन अथवा स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।