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Rishikesh News: हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं, सामान्य चोटों के उपचार के लिए भी भटक रहे मरीज
Sat, 26 Sep 2026 05:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:52 PM IST
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-राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तीन माह से खाली है पद,
- रोजाना करीब 100 हड्डी रोगी पहुंच रहे अस्पताल
ऋषिकेश। शहर के राजकीय उपजिला चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद तीन माह से रिक्त है। इस कारण मरीजों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि सामान्य चोट और फ्रैक्चर के मामलों में भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन घायलों और मरीजों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय की प्रतिदिन की ओपीडी 500 से 700 के बीच रहती है। इनमें करीब 100 मरीज हड्डी रोग से संबंधित होते हैं। दुर्घटनाओं, गिरने या अन्य कारणों से चोटिल होकर पहुंचने वाले कई मरीजों को जांच के बाद प्लास्टर अथवा अन्य आर्थोपेडिक उपचार की आवश्यकता होती है। लेकिन अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने से ऐसे मरीजों को समुचित उपचार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। खासकर निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता बीपी भारद्वाज, महेश प्रसाद, राकेश राणा आदि का कहना है कि निजी क्लीनिकों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा रही है।
- हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती शासन स्तर का विषय है। इस संबंध में शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों में मरीजों को बेहतर उपचार दिए जाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. आनंद सिंह राणा, सीएमएस।
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- रोजाना करीब 100 हड्डी रोगी पहुंच रहे अस्पताल
ऋषिकेश। शहर के राजकीय उपजिला चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद तीन माह से रिक्त है। इस कारण मरीजों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि सामान्य चोट और फ्रैक्चर के मामलों में भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन घायलों और मरीजों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय की प्रतिदिन की ओपीडी 500 से 700 के बीच रहती है। इनमें करीब 100 मरीज हड्डी रोग से संबंधित होते हैं। दुर्घटनाओं, गिरने या अन्य कारणों से चोटिल होकर पहुंचने वाले कई मरीजों को जांच के बाद प्लास्टर अथवा अन्य आर्थोपेडिक उपचार की आवश्यकता होती है। लेकिन अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने से ऐसे मरीजों को समुचित उपचार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। खासकर निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता बीपी भारद्वाज, महेश प्रसाद, राकेश राणा आदि का कहना है कि निजी क्लीनिकों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा रही है।
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- हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती शासन स्तर का विषय है। इस संबंध में शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों में मरीजों को बेहतर उपचार दिए जाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. आनंद सिंह राणा, सीएमएस।
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