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Rishikesh News: कोई स्ट्रेचर पर तो कोई व्हीलचेयर पर कराता है इलाज
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Iएम्स इमरजेंसी में बेड की संख्या 40, रोजाना भर्ती होने के लिए मरीज आते हैं 150
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Iएम्स की इमरजेंसी में आसानी से नहीं मिलता है बेडI
यदि आप अपने मरीज को एम्स के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराने ला रहे हैं तो पहले बेड की उपलब्धता के बारे में जानकारी जरूर जुटाएं। यहां मरीजों को कई दिन तक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर गुजारनी पड़ती है। इसका कारण इमरजेंसी विभाग में बेड की कमी है। यहां मात्र 40 बेड हैं। जबकि भर्ती होने के लिए इमरजेंसी विभाग में हर दिन करीब 150 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
एम्स ऋषिकेश अपनी स्थापना का 20वां साल मना रहा है। वर्ष 2004 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने एम्स की आधारशिला रखी थी। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद 27 मई 20213 से ओपीडी और 30 दिसंबर 2013 से यहां आईपीडी शुरू हुई थी। ओपीडी और आईपीडी शुरू होने के 10 सालों के सफर में एम्स में कई उपलब्धियां हासिल की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने पर यहां प्रतिदिन ओपीडी और आईपीडी की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में यहां प्रतिदिन ढाई से तीन हजार ओपीडी होती है।
एम्स में पर्याप्त भूमि न होने के कारण यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। जिसका सबसे अधिक प्रभाव इमरजेंसी विभाग पर ही पड़ रहा है। इमरजेंसी विभाग में मात्र 40 ही बेड हैं। जिसमें रेड जोन के 12, यलो जोन के 22 व क्रिटिकल केयर यूनिट के छह बेड शामिल हैं। इमरजेंसी में प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज भर्ती होने के लिए आते हैं। ऐसे में कई मरीजों को यहां कई दिनों तक बेड नहीं मिल पाता है। इन मरीजों को कई दिनों तक अपना इलाज स्ट्रेचर और व्हील चेयर पर ही कराना पड़ता है।
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I सीमित संसाधनों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने का हर संभव प्रयास किया जाता है। राज्य सरकार से 200 एकड़ भूमि एम्स को दिया जाना प्रस्तावित है। भूमि मिलने पर अस्पताल भवन का विस्तारीकरण कर बेड की संख्या तीन हजार तक की जाएगी। - प्रो. मीनू सिंह,I
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Iएम्स की इमरजेंसी में आसानी से नहीं मिलता है बेडI
यदि आप अपने मरीज को एम्स के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराने ला रहे हैं तो पहले बेड की उपलब्धता के बारे में जानकारी जरूर जुटाएं। यहां मरीजों को कई दिन तक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर गुजारनी पड़ती है। इसका कारण इमरजेंसी विभाग में बेड की कमी है। यहां मात्र 40 बेड हैं। जबकि भर्ती होने के लिए इमरजेंसी विभाग में हर दिन करीब 150 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
एम्स ऋषिकेश अपनी स्थापना का 20वां साल मना रहा है। वर्ष 2004 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने एम्स की आधारशिला रखी थी। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद 27 मई 20213 से ओपीडी और 30 दिसंबर 2013 से यहां आईपीडी शुरू हुई थी। ओपीडी और आईपीडी शुरू होने के 10 सालों के सफर में एम्स में कई उपलब्धियां हासिल की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने पर यहां प्रतिदिन ओपीडी और आईपीडी की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में यहां प्रतिदिन ढाई से तीन हजार ओपीडी होती है।
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एम्स में पर्याप्त भूमि न होने के कारण यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। जिसका सबसे अधिक प्रभाव इमरजेंसी विभाग पर ही पड़ रहा है। इमरजेंसी विभाग में मात्र 40 ही बेड हैं। जिसमें रेड जोन के 12, यलो जोन के 22 व क्रिटिकल केयर यूनिट के छह बेड शामिल हैं। इमरजेंसी में प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज भर्ती होने के लिए आते हैं। ऐसे में कई मरीजों को यहां कई दिनों तक बेड नहीं मिल पाता है। इन मरीजों को कई दिनों तक अपना इलाज स्ट्रेचर और व्हील चेयर पर ही कराना पड़ता है।
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I सीमित संसाधनों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने का हर संभव प्रयास किया जाता है। राज्य सरकार से 200 एकड़ भूमि एम्स को दिया जाना प्रस्तावित है। भूमि मिलने पर अस्पताल भवन का विस्तारीकरण कर बेड की संख्या तीन हजार तक की जाएगी। - प्रो. मीनू सिंह,I