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Rishikesh News: गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं पंडित
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परमार्थ निकेतन में परमार्थ निकेतन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे और अर्थ गंगा के संयुक्त तत्वावधान में गंगा के प्रति जागरूकता और आरती कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के 15 घाटों के 26 पंडितों ने प्रतिभाग किया।
आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की आरती केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। गंगा, जिसे हम मां के रूप में पूजते हैं, यह उनकी स्वच्छता, अविरलता और पवित्रता को बनाए रखने की जिम्मेदारी का प्रतीक है। परमार्थ निकेतन में गंगा तटों पर आरती करने वाले पंडितों और आचार्यों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे गंगा के प्रति समाज में जागरूकता ला सकें। जब घाटों के पंडित गंगा की पूजा-अर्चना करते हैं तो वे न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, बल्कि गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को भी मजबूत करते हैं। गंगा की आरती करना सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य ही नहीं है, बल्कि गंगा के संरक्षण और उनकी गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी है, जिसे आप सभी पंडितों को निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना होगा।
गंगा का अस्तित्व भारत के समृद्धि, विकास और जीवन के निरंतरता से जुड़ा हुआ है। आरती कार्यशाला का आयोजन केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि गंगा के संरक्षण और उसकी स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है। गंगा के प्रति हमारी जिम्मेदारी यही है कि हम उसे शुद्ध रखें, उसकी पवित्रता को बनाए रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए उसे एक जीवनदायिनी के रूप में सुरक्षित रखें। इस मौके पर गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, राकेश रोशन, वंदना शर्मा, पूजा मेहता, रेशमी एस, आचार्य दीलीप, ऋषिकुमार आयुष बडोनी आदि शामिल रहे।
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आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की आरती केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। गंगा, जिसे हम मां के रूप में पूजते हैं, यह उनकी स्वच्छता, अविरलता और पवित्रता को बनाए रखने की जिम्मेदारी का प्रतीक है। परमार्थ निकेतन में गंगा तटों पर आरती करने वाले पंडितों और आचार्यों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे गंगा के प्रति समाज में जागरूकता ला सकें। जब घाटों के पंडित गंगा की पूजा-अर्चना करते हैं तो वे न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, बल्कि गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को भी मजबूत करते हैं। गंगा की आरती करना सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य ही नहीं है, बल्कि गंगा के संरक्षण और उनकी गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी है, जिसे आप सभी पंडितों को निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना होगा।
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गंगा का अस्तित्व भारत के समृद्धि, विकास और जीवन के निरंतरता से जुड़ा हुआ है। आरती कार्यशाला का आयोजन केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि गंगा के संरक्षण और उसकी स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है। गंगा के प्रति हमारी जिम्मेदारी यही है कि हम उसे शुद्ध रखें, उसकी पवित्रता को बनाए रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए उसे एक जीवनदायिनी के रूप में सुरक्षित रखें। इस मौके पर गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, राकेश रोशन, वंदना शर्मा, पूजा मेहता, रेशमी एस, आचार्य दीलीप, ऋषिकुमार आयुष बडोनी आदि शामिल रहे।
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