{"_id":"606a0e838ebc3ee64d5de86b","slug":"lack-of-e-ticketing-machines-affected-the-operation-of-buses-rishikesh-news-drn3756136119","type":"story","status":"publish","title_hn":"ई-टिकटिंग मशीनों की कमी से प्रभावित हो रहा बसों का संचालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ई-टिकटिंग मशीनों की कमी से प्रभावित हो रहा बसों का संचालन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऋषिकेश। रोडवेज में ई-टिकटिंग मशीनों की कमी होने से बसों के संचालन पर असर पर रहा है। इससे रोडवेज की आय भी प्रभावित हो रही है। ई-टिकटिंग मशीनों को खरीदने की बाध्यता रोडवेज मुख्यालय से होने से स्थानीय डिपो स्तर पर चाहकर भी बाजार से ई-टिकटिंग मशीन नहीं खरीदी जा रही है।
ऋषिकेश डिपो में वर्तमान में 65 बसें हैं। इन बसों में से करीब 20 बसें दिल्ली रूट पर संचालित होती हैं। बाकी बसें चंडीगढ़, रुपैड़िया, हल्द्वानी, लखनऊ, गोपेश्वर, उत्तरकाशी और भटवाड़ी रूट पर संचालित होती हैं। डिपो में ई-टिकटिंग मशीन की कमी होने से कंडक्टरों को मैन्युअल टिकट दिए जा रहे हैं। डिपो में 65 बसों के सापेक्ष 49 ई-टिकटिंग मशीनें हैं। इन मशीनों में भी चार-पांच मशीनें खराब हैं। 10 मशीनें ऐसी हैं, जिनका प्रिंटर काम नहीं करता। ऐसी मशीनों से जब कंडक्टर टिकट निकालकर यात्री को देते हैं तो उस टिकट पर कंडक्टर को हाथ से धनराशि लिखनी पड़ती है। कई बसों में इस बात को लेकर कंडक्टरों और यात्रियों में बहस हो चुकी है। कई मशीनें ऐसे हैं, जिनका एडप्टर खराब हुआ है। मशीनों की कमी के कारण एक कंडक्टर को दूसरी बस के आने का इंतजार करना पड़ता है। जब दूसरे स्थान से बस आती है तो कंडक्टर की ओर से टिकटों का विवरण निकालकर कैस काउंटर पर कैश जमा कराया जाता है। उसके बाद इस मशीन में दूसरे रूट का किराया अपलोड करना पड़ता है। इस काम को करने में करीब 40 मिनट तक समय लग सकता है। ऐसे में दूसरे रूट की बस लेट हो जाती है। बस के लेट होने से रोडवेज के यात्री अन्य माध्यमों से अपना सफर तय करते हैं। ऐसे में रोडवेज को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। मैन्युअल टिकट ले जाने पर कंडक्टर को डबल मेहनत करनी पड़ती है। कंडक्टर जिस रूट पर जाएगा, मैन्युअल टिकट देने के बाद उसे वेबिल भरना पड़ेगा।
पांच साल से नहीं बदली गई ई-टिकटिंग मशीन
रोडवेज कंडक्टरों का कहना है कि पांच साल से ई-टिकटिंग मशीन नहीं बदली गई है। उनका कहना है कि हर बार वही पुरानी मशीन की मरम्मत कर डिपो में लौटाई जाती है, जो मरम्मत के चंद दिनों बाद खराब हो जाती है। वहीं डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों को फीड करने के लिए भी पर्याप्त कंप्यूटर न होने से बसें लेट हो रही हैं।
विज्ञापन
डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों की कमी को लेकर रोडवेज मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है। मुख्यालय की ओर से दो महीने में ई-टिकटिंग मशीन खरीदकर देने का वादा किया गया है। उम्मीद है कि मई की शुरुआत में ई-टिकटिंग मशीनें मिल जाएंगी।
-पीके भारती, एजीएम, रोडवेज डिपो ऋषिकेश
विज्ञापन
ऋषिकेश डिपो में वर्तमान में 65 बसें हैं। इन बसों में से करीब 20 बसें दिल्ली रूट पर संचालित होती हैं। बाकी बसें चंडीगढ़, रुपैड़िया, हल्द्वानी, लखनऊ, गोपेश्वर, उत्तरकाशी और भटवाड़ी रूट पर संचालित होती हैं। डिपो में ई-टिकटिंग मशीन की कमी होने से कंडक्टरों को मैन्युअल टिकट दिए जा रहे हैं। डिपो में 65 बसों के सापेक्ष 49 ई-टिकटिंग मशीनें हैं। इन मशीनों में भी चार-पांच मशीनें खराब हैं। 10 मशीनें ऐसी हैं, जिनका प्रिंटर काम नहीं करता। ऐसी मशीनों से जब कंडक्टर टिकट निकालकर यात्री को देते हैं तो उस टिकट पर कंडक्टर को हाथ से धनराशि लिखनी पड़ती है। कई बसों में इस बात को लेकर कंडक्टरों और यात्रियों में बहस हो चुकी है। कई मशीनें ऐसे हैं, जिनका एडप्टर खराब हुआ है। मशीनों की कमी के कारण एक कंडक्टर को दूसरी बस के आने का इंतजार करना पड़ता है। जब दूसरे स्थान से बस आती है तो कंडक्टर की ओर से टिकटों का विवरण निकालकर कैस काउंटर पर कैश जमा कराया जाता है। उसके बाद इस मशीन में दूसरे रूट का किराया अपलोड करना पड़ता है। इस काम को करने में करीब 40 मिनट तक समय लग सकता है। ऐसे में दूसरे रूट की बस लेट हो जाती है। बस के लेट होने से रोडवेज के यात्री अन्य माध्यमों से अपना सफर तय करते हैं। ऐसे में रोडवेज को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। मैन्युअल टिकट ले जाने पर कंडक्टर को डबल मेहनत करनी पड़ती है। कंडक्टर जिस रूट पर जाएगा, मैन्युअल टिकट देने के बाद उसे वेबिल भरना पड़ेगा।
विज्ञापन
पांच साल से नहीं बदली गई ई-टिकटिंग मशीन
रोडवेज कंडक्टरों का कहना है कि पांच साल से ई-टिकटिंग मशीन नहीं बदली गई है। उनका कहना है कि हर बार वही पुरानी मशीन की मरम्मत कर डिपो में लौटाई जाती है, जो मरम्मत के चंद दिनों बाद खराब हो जाती है। वहीं डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों को फीड करने के लिए भी पर्याप्त कंप्यूटर न होने से बसें लेट हो रही हैं।
विज्ञापन
डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों की कमी को लेकर रोडवेज मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है। मुख्यालय की ओर से दो महीने में ई-टिकटिंग मशीन खरीदकर देने का वादा किया गया है। उम्मीद है कि मई की शुरुआत में ई-टिकटिंग मशीनें मिल जाएंगी।
-पीके भारती, एजीएम, रोडवेज डिपो ऋषिकेश