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अस्सी के दशक में उद्योगपति बिडला ने तैयार कराई थी हवाईपट्टी
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डोईवाला। राज्य गठन के बाद हवाई सेवाओं को बहुत तेजी से विस्तार हुआ। दून वासियों ने हवाई सेवाओं को अपनी प्राथमिकता दी तो तेजी से हवाई सुविधाओं में इजाफा होता चला गया। अस्सी के दशक में उद्योगपति बिरला ने हवाईपट्टी बनाई थी। जो आज आधुनिक हवाई सेवाओं से संपन्न हो गई है।
80 के दशक के कभी कभार छोटे विमान आवाजाही करते थे। 90 के दशक के हवाई सेवाओं की थोड़ी मांग उठने लगी। तब इस पट्टी पर सेना के विमान आते या कभी कोई वीआईपी विमान से दून आता था। उस वक्त हवाई पट्टी पर चारो तरफ तारबाड़ हुआ करती थी। राज्य गठन के बाद हवाई सेवाओं की अधिक जरूरत को देखते हुए राजधानी में इसके विस्तार के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना शुरू हुई। शुरूआत में चार्टर प्लेन की आवाजाही शुरू हुई। शुरू में डेक्कन एविशन ने भी अपनी सेवाएं दी। साल 2008 में रनवे विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर वाणिज्यिक परिचालन शुरू हुआ। 2009 में एक ओर नई टर्मिनल बिल्डिंग तैयार की गई। लगातार हवाई सेवाओं की मांग बढ़ने पर दस साल बाद अधिक क्षमता वाली टर्मिनल बिल्डिंग के लिए काम शुरू हुआ। शुक्रवार को नई बिल्डिंग का लोकार्पण होने से राज्य की हवाई सेवाओं को पंख लग गए है।
सांसद निशंक ने वर्चुअली किया संबोधन
टर्मिनल बिल्डिंग लोकार्पण के मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होेंने कहा कि स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाए। ताकि उन्हें भविष्य में कोई परेशानी न हो। उन्होंने एयरपोर्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल इस पर जोर दिया। डॉ. निशंक ने कहा कि राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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फोटो कैप्शन
जौलीग्रांट एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग का अवलोकन करते केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आदि
-रिबन काटकर नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करते करते केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
-राज्य की संस्कृति से रूबरू कराती एयरपोर्ट पर बनी कलाकृतियां
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80 के दशक के कभी कभार छोटे विमान आवाजाही करते थे। 90 के दशक के हवाई सेवाओं की थोड़ी मांग उठने लगी। तब इस पट्टी पर सेना के विमान आते या कभी कोई वीआईपी विमान से दून आता था। उस वक्त हवाई पट्टी पर चारो तरफ तारबाड़ हुआ करती थी। राज्य गठन के बाद हवाई सेवाओं की अधिक जरूरत को देखते हुए राजधानी में इसके विस्तार के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना शुरू हुई। शुरूआत में चार्टर प्लेन की आवाजाही शुरू हुई। शुरू में डेक्कन एविशन ने भी अपनी सेवाएं दी। साल 2008 में रनवे विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर वाणिज्यिक परिचालन शुरू हुआ। 2009 में एक ओर नई टर्मिनल बिल्डिंग तैयार की गई। लगातार हवाई सेवाओं की मांग बढ़ने पर दस साल बाद अधिक क्षमता वाली टर्मिनल बिल्डिंग के लिए काम शुरू हुआ। शुक्रवार को नई बिल्डिंग का लोकार्पण होने से राज्य की हवाई सेवाओं को पंख लग गए है।
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सांसद निशंक ने वर्चुअली किया संबोधन
टर्मिनल बिल्डिंग लोकार्पण के मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होेंने कहा कि स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाए। ताकि उन्हें भविष्य में कोई परेशानी न हो। उन्होंने एयरपोर्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल इस पर जोर दिया। डॉ. निशंक ने कहा कि राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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जौलीग्रांट एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग का अवलोकन करते केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आदि
-रिबन काटकर नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करते करते केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
-राज्य की संस्कृति से रूबरू कराती एयरपोर्ट पर बनी कलाकृतियां