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त्रिवेणीघाट पर धूमधाम से मनाया जाएगा इगास पर्व: नेगी

Sat, 13 Nov 2021 02:06 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 13 Nov 2021 02:06 AM IST
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Igas festival will be celebrated with pomp: Negi
हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता करते गढ़ सेवा संस्थान के पदाधिकारी। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। गढ़ सेवा संस्थान ऋषिकेश की ओर से 14 नवंबर को त्रिवेणी घाट पर इगास पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
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हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता में गढ़ सेवा संस्थान ऋषिकेेश के अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने कहा कि संस्थान की ओर से 2016 से हर साल इगास पर्व मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि त्रिवेणीघाट में 14 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भैलो भी खेला जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों पलायन होने के कारण हमारी नई पीढ़ी गढ़वाल के रीति रिवाजों, तीज त्योहारों से दूर होती जा रही है। इसलिए अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और तीज त्योहारों से नई पीढ़ी को अवगत कराने के लिए इगास पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में हास्य कलाकार घनानंद घन्ना, लोक गायक पदम सिंह गुसाईं, लोकगायक धूम सिंह रावत भी कार्यक्रम में समां बाधेंगे। संस्थान के सचिव रविंद्र राणा ने कहा है कि संस्थान की ओर से पलायन रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्कृष्ठ काम करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जा चुका है। मनोज ध्यानी ने कहा कि विधायक निधि से संस्थान को जो ट्रैक्टर और टैंकर दिया गया था उससे ग्रामीण क्षेत्रों से सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया। उन्होंने कहा कि इगास के त्योहार में मुख्य आकर्षण भैलो रहेगा। संस्कति विभाग की टीम की ओर से नंदा राजजात की झांकी निकाली जाएगी। मंडाण भी लगाया जाएगा। प्रेस वार्ता गोपाल सती, भगवती प्रसाद रतूड़ी, अरुण बडोनी, सुमित पंवार आदि थे।
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क्या है इगास पर्व
- दीपावली (बग्वाल) के 11 वें दिन इगास का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बग्वाल की तरह भैलो खेला जाता है। दीपावली की तर्ज इस दिन स्वाल (दाल के भरे परांठे) बनाए जाते हैं। यह भी मान्यता है कि बाहरी हवाओं (भूत प्रेत बाधा) से रक्षा के लिए भैलो खेला जाता है। जो अग्नि देवता प्रतीक होता है। अग्नि को प्रसाद चढाने के बाद ही भैलो खेला जाता है। उसके बाद ही कार्यक्रम होते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ इलाकों में चीड़ देवदार की लकड़ी के भैलो बनाए जाते हैं, निचले क्षेत्रों में तिल के पौधे की सूखी लकड़ी से भैलो बनाया जाता है। जिन स्थानों पर यह चीज उपलब्ध नहीं होती उन स्थानों पर भीमल की लकड़ी और स्योलू (भीमल से निकलने वाला फाइवर) के भैलो बनाए जाते हैं।
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चौदह बीघा में भी मनाया जाएगा इगास
ऋषिकेेश। 14 नवंबर को चौदहबीघा स्थित नए पुल के पास इगास पर्व का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक विनोद बिजल्वाण ने बताया कि इगास पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में लोकगायक धूम सिंह रावत और पूनम सती मौजूद रहेंगी। कार्यक्रम में भैलो भी खेला जाएगा। राकेश दास और साथियों की ओर से मंडाण भी लगाया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम को लेकर आयोजकों की ओर से बैठक भी की गई। इस अवसर पर पूर्व दर्जाधारी रमेश उनियाल, जगमोहन भंडारी, वीरेंद्र कंडारी, राजेंद्र राणा आदि थे।
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