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Rishikesh News: परमार्थ निकेतन पहुंचा योगार्थियों का दल
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रेडियंट बॉडी योगा की संस्थापक किआ मिलर और रिकवरी 2.0 के संस्थापक टॉमी रोजन के नेतृत्व में योगार्थियों का एक दल बुधवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचा। जहां उन्होंने योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, दर्शन व जीवन मूल्यों के विषय में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
किआ मिलर ने कहा कि योग हमें स्वास्थ्य प्रदान करता है। लेकिन स्वस्थ रहने का मुख्य स्रोत प्रकृति है। हमें भारतीय संस्कृति की रीढ़, नींव या मूल को समझने के लिए प्रकृति के साथ समरसता पूर्वक जीने का अभ्यास करना होगा। इसके लिए हमारी दैनंदिन गतिविधियों में प्रकृति के अनुकूल परिवर्तन करना आवश्यक है।
टॉमी रोजन ने कहा कि नशा शरीर को प्रदूषित करता है। उसी प्रकार हमारे व्यवहार का नशा प्रकृति को प्रदूषित कर रहा है। शरीर व प्रकृति दोनों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। यह योग व ध्यान के माध्यम से ही सम्भव है।
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स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत में नदियों, वृक्षों, सूर्य, धरती व प्राकृतिक संसाधनों की पूजा की जाती है। भौतिक और आध्यात्मिक तत्वों को साथ लेकर चलना भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रकृति व पर्यावरण हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं। इसलिए स्वयं स्वस्थ रहने के लिए प्राणवायु के स्रोत को स्वस्थ रखना आवश्यक है। इस दौरान विश्व के अनेक देशों से आए योगार्थियों ने परमार्थ गंगा आरती में भी प्रतिभाग किया।
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किआ मिलर ने कहा कि योग हमें स्वास्थ्य प्रदान करता है। लेकिन स्वस्थ रहने का मुख्य स्रोत प्रकृति है। हमें भारतीय संस्कृति की रीढ़, नींव या मूल को समझने के लिए प्रकृति के साथ समरसता पूर्वक जीने का अभ्यास करना होगा। इसके लिए हमारी दैनंदिन गतिविधियों में प्रकृति के अनुकूल परिवर्तन करना आवश्यक है।
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टॉमी रोजन ने कहा कि नशा शरीर को प्रदूषित करता है। उसी प्रकार हमारे व्यवहार का नशा प्रकृति को प्रदूषित कर रहा है। शरीर व प्रकृति दोनों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। यह योग व ध्यान के माध्यम से ही सम्भव है।
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स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत में नदियों, वृक्षों, सूर्य, धरती व प्राकृतिक संसाधनों की पूजा की जाती है। भौतिक और आध्यात्मिक तत्वों को साथ लेकर चलना भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रकृति व पर्यावरण हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं। इसलिए स्वयं स्वस्थ रहने के लिए प्राणवायु के स्रोत को स्वस्थ रखना आवश्यक है। इस दौरान विश्व के अनेक देशों से आए योगार्थियों ने परमार्थ गंगा आरती में भी प्रतिभाग किया।