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पंचायत प्रशासन लापरवाही पर्यटकों के लिए बनी आफत
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ऋषिकेश। स्वर्गाश्रम जौंक क्षेत्र में निराश्रित पशु पर्यटकों की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए। आए दिन निराश्रित पशु पर्यटकों को घायल कर रहे हैं। यहां तक कि निराश्रित पशु के कारण हुई दुर्घटना के चलते एक पर्यटक को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। इसके बावजूद स्वार्गाश्रम जौंक पंचायत प्रशासन पशुओं को सड़क पर छोड़ने वाले गोशाला संचालकों और पशुपालकों पर कार्रवाई करने से बच रहा है।
स्वार्गाश्रम क्षेत्र योगनगरी का प्रमुख पयर्टक स्थल है। लक्ष्मणझूला, रामझूला, जानकीसेतु, परमार्थ निकेतन को देखने के लिए वीकेंड में बड़ी संख्या में पयर्टक स्वर्गाश्रम क्षेत्र में पहुंचते हैं। न पिछले कई सालों से स्वार्गाश्रम क्षेत्र निराश्रित पशुओं का अड्डा बना हुआ है। सड़कों पर बड़ी संख्या में निराश्रित पशु घूमते दिखना यहां आम बात हैं। निराश्रित पशु सड़कों पर गंदगी तो फैलाते है, इसके साथ पर्यटकों पर हमला भी बोल देते हैं। आए दिन निराश्रित पशुओं के हमले के कारण पर्यटक घायल होते हैं। सोमवार को स्वार्गाश्रम क्षेत्र में स्कूटी से घूमने निकले एक पर्यटक के आगे अचानक निराश्रित नंदी आ गया है। इस दौरान नंदी को बचाने के चक्कर में पर्यटक की स्कूटी फिसल गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। एम्स में इलाज के दौरान पर्यटक की मौत हो गई। असल में स्वार्गाश्रम क्षेत्र के आसपास कई गोशालाएं हैं। गोशाला संचालक पशुओं को सड़क पर छोड़ देते हैं। स्वार्गाश्रम जौंक क्षेत्र के आसपास के गांवों पशुपालक भी अपने नंदी और वृद्ध गाय को सड़कों पर छोड़ देते हैं। पंचायत प्रशासन पशुओं को तो पकड़ता है। लेकिन कुछ समय बाद पशु फिर सड़क पर आ जाते हैं। नगर पंचायत प्रशासन गोशाला संचालकों और पशुपालकों पर कार्रवाई से बचता है। इसके चलते ही पशुओं के हमलों की घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है।
- टैगिंग की योजना बनी रस्मम अदायगी
सड़क पर घूमने वाले कई पशुओं पर टैग लगे होते हैं। इससे पशुपालक की पहचान करना आसान होता है। वहीं चालानी कार्रवाई कर कर पशुओं को सड़क छोड़ने की प्रवृति पर अकुंश लगाया जाता है। लेकिन पंचायत प्रशासन की कार्रवाई केवल पशुुओं को पकड़कर कांजी हाउस तक पहुंचाने तक सीमित है।
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- पशुओं को पकड़ने के लिए दो बार बड़े स्तर अभियान चलाया गया। इस दौरान 50 पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में रखवाया गया। लेकिन स्वार्गाश्रम क्षेत्र के आसपास के गांवों के पशुपालक नंदी और बूढ़ी गायों को लगातार सड़कों पर छोड़ रहे हैं। ऐसे पशुपालकों के चिह्निीकरण और कार्रवाई के लिए अभियान शुरू किया जाएगा।
-मंजू चौहान, अधिशासी अधिकारी, स्वार्गाश्रम जोंक
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स्वार्गाश्रम क्षेत्र योगनगरी का प्रमुख पयर्टक स्थल है। लक्ष्मणझूला, रामझूला, जानकीसेतु, परमार्थ निकेतन को देखने के लिए वीकेंड में बड़ी संख्या में पयर्टक स्वर्गाश्रम क्षेत्र में पहुंचते हैं। न पिछले कई सालों से स्वार्गाश्रम क्षेत्र निराश्रित पशुओं का अड्डा बना हुआ है। सड़कों पर बड़ी संख्या में निराश्रित पशु घूमते दिखना यहां आम बात हैं। निराश्रित पशु सड़कों पर गंदगी तो फैलाते है, इसके साथ पर्यटकों पर हमला भी बोल देते हैं। आए दिन निराश्रित पशुओं के हमले के कारण पर्यटक घायल होते हैं। सोमवार को स्वार्गाश्रम क्षेत्र में स्कूटी से घूमने निकले एक पर्यटक के आगे अचानक निराश्रित नंदी आ गया है। इस दौरान नंदी को बचाने के चक्कर में पर्यटक की स्कूटी फिसल गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। एम्स में इलाज के दौरान पर्यटक की मौत हो गई। असल में स्वार्गाश्रम क्षेत्र के आसपास कई गोशालाएं हैं। गोशाला संचालक पशुओं को सड़क पर छोड़ देते हैं। स्वार्गाश्रम जौंक क्षेत्र के आसपास के गांवों पशुपालक भी अपने नंदी और वृद्ध गाय को सड़कों पर छोड़ देते हैं। पंचायत प्रशासन पशुओं को तो पकड़ता है। लेकिन कुछ समय बाद पशु फिर सड़क पर आ जाते हैं। नगर पंचायत प्रशासन गोशाला संचालकों और पशुपालकों पर कार्रवाई से बचता है। इसके चलते ही पशुओं के हमलों की घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है।
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- टैगिंग की योजना बनी रस्मम अदायगी
सड़क पर घूमने वाले कई पशुओं पर टैग लगे होते हैं। इससे पशुपालक की पहचान करना आसान होता है। वहीं चालानी कार्रवाई कर कर पशुओं को सड़क छोड़ने की प्रवृति पर अकुंश लगाया जाता है। लेकिन पंचायत प्रशासन की कार्रवाई केवल पशुुओं को पकड़कर कांजी हाउस तक पहुंचाने तक सीमित है।
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- पशुओं को पकड़ने के लिए दो बार बड़े स्तर अभियान चलाया गया। इस दौरान 50 पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस में रखवाया गया। लेकिन स्वार्गाश्रम क्षेत्र के आसपास के गांवों के पशुपालक नंदी और बूढ़ी गायों को लगातार सड़कों पर छोड़ रहे हैं। ऐसे पशुपालकों के चिह्निीकरण और कार्रवाई के लिए अभियान शुरू किया जाएगा।
-मंजू चौहान, अधिशासी अधिकारी, स्वार्गाश्रम जोंक