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Rishikesh News: सामरिक और रेस्क्यू की दृष्टि से महत्वपूर्ण है दून एयरपोर्ट
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I2013 की आपदा के रेस्क्यू में उपयोगी साबित हो चुका है देहरादून एयरपोर्ट
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Iसेना के विशालकाय विमानों से उतरने वाले उपकरण भेजे जा रहे सिलक्याराI
जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट व्यावसायिक उड़ानों के साथ ही सामरिक और रेस्क्यू की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद से लेकर अब तक इस एयरपोर्ट पर कई छोटे-बड़े रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा चुके हैं। सिलक्यारा टनल में फंसे हुए श्रमिकों के लिए इसी एयरपोर्ट से भारी मशीन और जरूरी उपकरण उत्तरकाशी भेजे जा रहे हैं।
जौलीग्रांट स्थित एसडीआरएफ मुख्यालय, हिमालयन अस्पताल और ऋषिकेश एम्स एयरपोर्ट को और भी खास बनाते हैं। रेस्क्यू मिशन के लिए एयरपोर्ट से एसडीआरएफ जवानों को आसानी से घटनास्थल पर भेजा जाता है। वहीं एयर लिफ्ट कर लाए गए घायलों को आसानी से बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया जा सकता है। 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान सबसे पहले रेस्क्यू कार्यों की शुरुआत इसी एयरपोर्ट से की गई थी। जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं को रेस्क्यू कर जौलीग्रांट लाया गया था। जिन्हें सकुशल उनके घरों तक भिजवाया गया।
आपदा में सैकड़ों घायलों का इलाज जौलीग्रांट अस्पताल में किया गया। देश-विदेश के सैकड़ों वीवीआईपी को चारधाम दर्शन कराने में भी इसी एयरपोर्ट को इस्तेमाल होता है। 2006-07 में जौलीग्रांट ग्राम सभा स्थित 3500 फीट लंबी हवाई पट्टी का विस्तार कर 7021 फीट किया गया। जिस कारण यहां बड़े विमानों की आवाजाही सुनिश्चित हुई। रात में सैन्य विमानों की आवाजाही के लिए पूरे स्टॉफ को रात तक रोका जाता है। वहीं दिन में सैन्य विमानों की आवाजाही के लिए व्यावसायिक उड़ानों के बीच में सैन्य विमानों को उतारना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
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Iसैन्य विमानों की पार्किंग को चाहिए काफी जगहI
दून एयरपोर्ट पर फ्लाइटों के मूवमेंट के दौरान सैन्य विमानों की आवाजाही में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की आती है। एयरपोर्ट पर उतरने वाले सभी व्यावसायिक विमान आसानी से पार्क हो जाते हैं। लेकिन 174 फीट लंबे, 170 फीट चौड़े और 55 फीट ऊंचे सी 17-ग्लोबमास्टर को खड़ा करना और उससे रेस्क्यू सामान को नीचे उतारना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सोमवार को फ्लाइटों के बीच तीन सैन्य विमान एयरपोर्ट पर उतरे। जिन्हें अलग-अलग स्थानों पर खड़ा किया गया।
Iसुखोई विमान भर चुके उड़ानI
अप्रैल 2018 में देहरादून एयरपोर्ट से तीन सुखोई विमान कई दिनों तक उड़ान भरकर अभ्यास कर चुके हैं। चीन सीमा से सटे होने के कारण देहरादून एयरपोर्ट पर सुखोई विमान कई घंटों का अभ्यास कर चुके हैं।
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Iपिछले एक हफ्ते से उत्तरकाशी रेस्क्यू के लिए वायुसेना के बड़े विमानों से मशीन और उपकरण लाए जा रहे हैं। जिस कारण एयरपोर्ट को देर रात तक भी खोला जा रहा है। - प्रभाकर मिश्रा एयरपोर्ट निदेशकI
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Iसेना के विशालकाय विमानों से उतरने वाले उपकरण भेजे जा रहे सिलक्याराI
जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट व्यावसायिक उड़ानों के साथ ही सामरिक और रेस्क्यू की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद से लेकर अब तक इस एयरपोर्ट पर कई छोटे-बड़े रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा चुके हैं। सिलक्यारा टनल में फंसे हुए श्रमिकों के लिए इसी एयरपोर्ट से भारी मशीन और जरूरी उपकरण उत्तरकाशी भेजे जा रहे हैं।
जौलीग्रांट स्थित एसडीआरएफ मुख्यालय, हिमालयन अस्पताल और ऋषिकेश एम्स एयरपोर्ट को और भी खास बनाते हैं। रेस्क्यू मिशन के लिए एयरपोर्ट से एसडीआरएफ जवानों को आसानी से घटनास्थल पर भेजा जाता है। वहीं एयर लिफ्ट कर लाए गए घायलों को आसानी से बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया जा सकता है। 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान सबसे पहले रेस्क्यू कार्यों की शुरुआत इसी एयरपोर्ट से की गई थी। जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं को रेस्क्यू कर जौलीग्रांट लाया गया था। जिन्हें सकुशल उनके घरों तक भिजवाया गया।
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आपदा में सैकड़ों घायलों का इलाज जौलीग्रांट अस्पताल में किया गया। देश-विदेश के सैकड़ों वीवीआईपी को चारधाम दर्शन कराने में भी इसी एयरपोर्ट को इस्तेमाल होता है। 2006-07 में जौलीग्रांट ग्राम सभा स्थित 3500 फीट लंबी हवाई पट्टी का विस्तार कर 7021 फीट किया गया। जिस कारण यहां बड़े विमानों की आवाजाही सुनिश्चित हुई। रात में सैन्य विमानों की आवाजाही के लिए पूरे स्टॉफ को रात तक रोका जाता है। वहीं दिन में सैन्य विमानों की आवाजाही के लिए व्यावसायिक उड़ानों के बीच में सैन्य विमानों को उतारना काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
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Iसैन्य विमानों की पार्किंग को चाहिए काफी जगहI
दून एयरपोर्ट पर फ्लाइटों के मूवमेंट के दौरान सैन्य विमानों की आवाजाही में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की आती है। एयरपोर्ट पर उतरने वाले सभी व्यावसायिक विमान आसानी से पार्क हो जाते हैं। लेकिन 174 फीट लंबे, 170 फीट चौड़े और 55 फीट ऊंचे सी 17-ग्लोबमास्टर को खड़ा करना और उससे रेस्क्यू सामान को नीचे उतारना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सोमवार को फ्लाइटों के बीच तीन सैन्य विमान एयरपोर्ट पर उतरे। जिन्हें अलग-अलग स्थानों पर खड़ा किया गया।
Iसुखोई विमान भर चुके उड़ानI
अप्रैल 2018 में देहरादून एयरपोर्ट से तीन सुखोई विमान कई दिनों तक उड़ान भरकर अभ्यास कर चुके हैं। चीन सीमा से सटे होने के कारण देहरादून एयरपोर्ट पर सुखोई विमान कई घंटों का अभ्यास कर चुके हैं।
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Iपिछले एक हफ्ते से उत्तरकाशी रेस्क्यू के लिए वायुसेना के बड़े विमानों से मशीन और उपकरण लाए जा रहे हैं। जिस कारण एयरपोर्ट को देर रात तक भी खोला जा रहा है। - प्रभाकर मिश्रा एयरपोर्ट निदेशकI