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सरकारी अस्पताल में फिर टप्पेबाजी
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
Updated Sun, 13 Dec 2015 01:07 AM IST
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सरकारी अस्पताल में पर्ची बनवाने, मरहम पट्टी या उपचार शुल्क जमा कराने के लिए लाइन में खड़े हैं तो सावधान रहें। लापरवाही भारी पड़ सकती है। दरअसल अस्पताल में टप्पेबाज गिरोह सक्रिय है, जो सप्ताहभर में दो लोगों के पर्स उड़ा चुके हैं। शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रशासन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं कर रहा।
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शनिवार को पालिका कर्मी तानसेन निवासी वाल्मीकि नगर तबियत बिगड़ने पर पत्नी ऊषा के साथ सरकारी अस्पताल आए। ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने खून की जांच कराने की सलाह दी। पैैथोलॉजी जांच से पहले अस्पताल के काउंटर संख्या 30 में शुल्क जमा करने के लिए उनकी पत्नी लाइन में खड़े हो गई, इस बीच तानसेन ने जेब से पर्स निकालकर पत्नी को दिया और वह समीप सीट पर बैठ गए।
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नंबर आने पर पत्नी ने स्वेटर की जेब में हाथ डाला, उसमें रखा पर्स गायब था। उनके होश उड़ गए। उनके पीछे खड़ी दो महिलाएं भी वहां नहीं थी। आसपास काफी खोजबीन की लेकिन पर्स का पता नहीं चला। पालिका कर्मी ने बताया कि पर्स में पांच हजार रुपये, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और टेलीफोन डायरी थी। उन्होंने मामले की सूचना कोतवाली पुलिस को दे दी है।
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बता दें चार दिसंबर को सरकारी अस्पताल में मरहम पट्टी कराने आई आशुतोष नगर की एक महिला का टप्पेबाज पर्स ले उड़े थे। पर्स में 15 हजार रुपये और सोने की चेन थी।
इनकी सुनिए
अधिकांश टप्पेबाज महिलाएं मरीज बनकर आती हैं, ऐसे में उनकी पहचान संभव नहीं हो पाती। पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। अस्पताल में महज चार सुरक्षा गार्ड है, ऐसे में पुख्ता सुरक्षा संभव नहीं है। पुलिस को घटना की जानकारी दे दी जाती है।-डा. अशोक गैरोला, मुख्य चिकित्साधीक्षक