{"_id":"58f670114f1c1b38744729ad","slug":"chardham-travel-accident-insurance-plan-not-approved-for-six-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह साल से नहीं मिली चारधाम यात्रा दुर्घटना बीमा योजना को मंजूरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह साल से नहीं मिली चारधाम यात्रा दुर्घटना बीमा योजना को मंजूरी
हेमवती नंदन भट्ट /ऋषिकेश।
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:29 AM IST
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चारधाम यात्रा
- फोटो : Demo Pic
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राज्य सरकार और पर्यटन विभाग उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को प्रस्ताव के छह साल बाद भी यात्रा दुर्घटना बीमा सुविधा का लाभ नहीं दे पाई है। इस साल भी चारधाम यात्रा पर आने वाले अधिकांश तीर्थाटकों को बीमा सुरक्षा कवच से वंचित रहना होगा।
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यह हालात तब हैं जबकि प्रस्तावित योजना में बीमा के लिए दिए जाने वाले महज एक टाइम के प्रीमियम में राज्य सरकार को कुछ भी खर्च नहीं करना है। गौरतलब है कि पर्यटन विभाग ने वर्ष 2012 में चारधाम यात्रा तैयारियों के समय आयोजित बैठकों में सबसे पहले यात्रा दुर्घटना बीमा योजना का प्रस्ताव रखा गया था।
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विभाग द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी भी नहीं दी गई। ऐसे में यदि योजना तभी लागू कर दी जाती तो वर्ष-2013 में चारधाम यात्रा के दौरान आई आपदा में हताहत हुए लोगों के परिजनों को इसका लाभ मिलता और राज्य सरकार पर भी दुर्घटना के मुआवजे का बोझ काफी हद तक कम हो जाता।
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इसके बाद से उक्त प्रस्ताव को साल-दर साल चारधाम यात्रा की बैठकों में रखा तो गया, लेकिन हर बार प्रस्ताव शासन में अटक जाता है। इसके कारण यात्रा पर आने वाले लोगों के साथ अपरिहार्य कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं में मृतक यात्रियों को बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा।
योजना के मुताबिक इंश्योरेंस कंपनी को दिए जाने वाली यात्रा बीमा की प्रीमियम राशि अधिकतम 15 रुपये की वसूली यात्रियों से ही यात्रा पंजीकरण के समय ली जानी थी। इसमें राज्य सरकार और विभाग का कोई अंशदान शामिल नहीं था, लेकिन सरकार तीर्थयात्रियों की बीमा सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना पर आज तक लापरवाह रही है।
पर्यटन विभाग की मानें तो इस साल विभाग द्वारा भारत सरकार द्वारा देश के विभिन्न प्रांतों में स्टेट ई-मिशन टी एसइएमटी के तहत स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर सीएससी के माध्यम से चारधाम यात्रा की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले यात्रियों को 20 रुपये में दो लाख का दुर्घटना बीमा योजना लागू की गई है।
उक्त धनराशि पंजीकरण कराते समय यात्रियों से ली जाएगी। विभाग का दावा है कि इसका लाभ साइबर कैफे से यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पर भी मिलेगा, लेकिन महकमे ने इस योजना के लाभ से अधिकांश यात्री वंचित रह जाएंगे।
कारण गांवों में जिन कॉमन सर्विस सेंटरों को खोलने की बात विभाग कर रहा है, वह अभी अधिकांश क्षेत्रों में स्थापित ही नहीं हुए हैं और न ही सभी जगह साइबर कैफे हैं। इसके अलावा चारधाम यात्रा पर जाने वाले अधिकांश तीर्थयात्री हरिद्वार, ऋषिकेश से विभिन्न धामों तक स्थापित किए गए बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन सेंटरों पर ही मैनुअल पंजीकरण कराते हैं। ऐसे तीर्थाटकों का प्रतिशत 98 व 99 है। ऐसे यात्रियों के लिए बीमा स्कीम में प्रावधान ही नहीं है।
अगली बार बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
पर्यटन विभाग के डायरेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर आरके जोशी ने बताया कि सीएससी के जरिए यात्रा रजिस्ट्रेशन कराने पर दुर्घटना बीमा का लाभ इस साल से दिया जाएगा, लेकिन जब उनसे यह सवाल किया गया कि अधिकांश लोग मैनुअल यात्रा पंजीयन कराते हैं, वह तो लाभ से वंचित रह जाएंगे।
तो उनका कहना है कि आईडिया अच्छा है। ऐसे यात्रियों के लिए बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ही बीमित करने का प्रस्ताव आगामी बैठकों में रखा जाएगा।