फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Ringing Breaking the silence in Gangotri

गंगोत्रीः घंटियों की आवाज तोड़ रही सन्नाटा

Mon, 01 Jul 2013 07:20 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
उत्तरकाशी/ब्यूरो Updated Mon, 01 Jul 2013 07:20 PM IST
विज्ञापन
Ringing Breaking the silence in Gangotri

बीते वर्षों तक इन दिनों श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहने वाले गंगोत्री मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा है। गंगोत्री धाम में पसरे सन्नाटे को अगर कोई तोड़ रहा है तो वह गंगा का वेग और मंदिर में सुबह-शाम की आरती में बजने वाली घंटियां हैं।

विज्ञापन


रोजाना की तरह प्रात: चार बजे घंटे-घंडियाल और शंख ध्वनि के साथ मंदिर के द्वार खुलने से लेकर शाम तक पूजा-अर्चना, आरती, भोग आदि तमाम धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनमें चंद तीर्थ पुरोहित और साधु-संत ही नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन


बाढ़ में गंगोत्री राजमार्ग तबाह होने के बाद कोई इस ओर रुख नहीं कर रहा है। 16-17 जून को यहां फंसे सभी तीर्थयात्रियों को 20-21 जून तक सुरक्षित निकाल लिया गया था। बोझिल मन से इस सीजन में आगे रोजगार की आस समाप्त होने पर व्यापारी और तीर्थ पुरोहित भी पलायन कर गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गंगा मैय्या के लिए नियम कायम
अब यहां साधु-संतों समेत कुल डेढ़-दो सौ लोग ही रह गए हैं। इनमें कुछ पुलिस कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी व नगर पंचायत के कर्मचारी भी शामिल हैं। बीते वर्षों में इन दिनों यहां तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों की खासी चहल-पहल रहती थी, लेकिन आपदा ने ऐसा कहर ढाया कि गंगोत्री धाम अब शीतकाल सी खामोशी समेटे हुए है। धाम में सब कुछ थम सा जरूर गया है, लेकिन गंगा मैय्या के लिए नियम कायम हैं।

पुजारी सुधांशू, मुकेश, अमरीश, कुलदीप आदि नित्य ब्रह्ममुहूर्त में उत्थापन कर मंदिर की साफ-सफाई के बाद प्रात: छह बजे गंगा आरती करते हैं। दिनभर होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी विधि विधान के साथ किए जा रहे हैं।

मोबाइल फोन काम कर रहे हैं, इसलिए गंगोत्री के वाशिंदे देश-दुनिया की हर खबर से बाखबर हैं। धाम में पसरे वीराने के बावजूद मां गंगा से अपने भक्तों की रक्षा की गुहार लगाना पंडो का नित्य कर्म है। यह बात दीगर है कि अब नित्य कर्म की समय सारणी नहीं है और आपदा के जख्म मंदिर के बाहर लगे बोर्ड पर नजर आ रहे हैं, जहां कभी समयसारिणी का जिक्र होता था।


इनका भी दर्द सुनिए
'अब तक केवल सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह ही गंगोत्री की सुध लेने पहुंची। चार नवंबर को मंदिर के कपाट बंद होने तक यहां पूजा-अर्चना आदि नित्य कर्म चलते रहेंगे। ऐसे में यहां रहने वालों के लिए सरकार को रसद एवं ईंधन की व्यवस्था तो करनी ही चाहिए।'

भागेश्वर प्रसाद सेमवाल, अध्यक्ष गंगोत्री मंदिर समिति।

'सीजन में गंगोत्री में कभी ऐसा सन्नाटा नहीं देखा। गंगोत्री के साधु-संत तो पहले से ही सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं, लेकिन प्रशासन कम से कम गंगोत्री को जीवंत रखने के लिए अन्य लोगों की तो सुध ले।'
ब्रह्मचारी अनिल स्वरूप, श्रीकृष्णाश्रम गंगोत्री।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed