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मौत के मुंह में जाकर बचाई जिंदगियां
कोटद्वार/ ब्यूरो्
Updated Sun, 23 Jun 2013 04:57 PM IST
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केदारनाथ धाम में उसे तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। आम दिनों की तरह उस दिन भी पूरे समय वह व्यवस्थाओं में जुटा रहा। ड्यूटी पूरी करने के बाद 16 जून की रात आराम करने गया तभी आसमान से आफत बरसने लगी।
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वह बाहर निकला तो पहाड़ से मलबा और पानी का सैलाब हजारों लोगों को लील जाने के लिए उमड़ता नजर आया।
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मौत का मंजर सामने देखते हुए भी वह भागा नहीं बल्कि मलबे के बीच लोगों को बचाने कूद पड़ा। खुद की जान दांव पर लगाकर उसने तीस यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
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खुद लोगों को बचाने में जुटे
यह जांबाज है कोटद्वार के पदमपुर निवासी धनराज सिंह रावत। धनराज पुलिस कांस्टेबल है जो 16 जून को केदारनाथ धाम में तैनात था। शनिवार की देर रात धनराज को उपचार के लिए राजकीय संयुक्त अस्पताल लाया गया।
धनराज के अनुसार भारी बारिश में केदारनाथ के ऊपर स्थित गांधी सरोवर के क्षतिग्रस्त होने से पहाड़ से मलबा और पानी नीचे आ गया। यह देख उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित किया और खुद लोगों को बचाने में जुट गया।
मलबे में फंसे कई लोग बचाने की गुहार लगा रहे थे। एक-एक कर वह तीस तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में ले गया। इसके बाद भी कोशिश की, लेकिन मलबा इतना आ चुका था कि फिर संभव नहीं हो सका। तब तक धनराज खुद भी काफी चोटिल हो चुका था।
हिम्मत नहीं हारी
इसके बाद भी धनराज ने हिम्मत नहीं हारी। अगली सुबह वह मंदिर से तीन सौ लोगों को अपने साथ पैदल जंगलचट्टी तक सुरक्षित लेकर आया। यहां से उन्हें हेलीकाप्टर से निकाल लिया गया। चोटिल धनराज पैदल फाटा आ गया। वहां अस्पताल में भर्ती हुआ और अब कोटद्वार में उसका इलाज किया जा रहा है।
धनराज के शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो गया है। मौत के मुंह से निकले धनराज को देख परिवार में खुशी का माहौल है। पत्नी सतेश्वरी देवी, बेटे अंकुश-अमित बार-बार भगवान को उसकी सलामती के लिए धन्यवाद करते रहे।