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गोरी नदी पर नौ साल बाद भी नहीं बन पाया पुल , जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं लोग
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मुनस्यारी। तहसील बंगापानी में गोरी नदी के एक छोर पर बसे ग्रामीणों की समस्याएं आज भी जस की तस हैं। नौ साल पहले की आपदा का दंश क्षेत्रवासी अभी भी झेल रहे हैं।
जनता को राहत देने के नाम पर जो हो रहा है वह केवल छलावा है। गोरी नदी के दोनों पाटों के बीच की दूरी आज भी यथावत है। पुल नहीं बनाने की मांग के लिए कई बार लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन पुल निर्माण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं, लोग लकड़ी के कच्चे पुल के सहारे वर्षाकाल में उफनाती गोरी नदी पार करने के लिए मजबूर हैं।
वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी पर बना लुम्ती-घरूड़ी पुल बह गया था। इस स्थान पर तब मोटर पुल की स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2016 से मोटर पुल का निर्माण शुरू हुआ।
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तीन साल गुजर गए 110 मीटर लंबा मोटर पुल नहीं बन सका है। पुल निर्माण के नाम पर मात्र आधार दीवार बनाकर छोड़ दिया गया है। विगत आठ माहों से पुल निर्माण का कार्य भी बंद कर दिया है।
स्कूली बच्चे ट्राली के सहारे विद्यालय पहुंचते हैं। पांच साल पहले ट्राली से गिरने से एक ग्रामीण की मौत भी हो चुुुकी है। ट्राली से यात्रा करने पर अब तक 25 से अधिक लोग घायल भी हो चुके हैं। इस मामले में अस्कोट लोनिवि के ईई को फोन किया,लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
11 करोड़ 87 लाख हैं स्वीकृत पुल निर्माण के लिए
मुनस्यारी। लुम्ती-घरूड़ी में मोटर पुल के निर्माण के लिए 11 करोड़ 87 लाख रुपये स्वीकृत हैं। डिजायन में गड़बड़ी के कारण अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। पुल नहीं होने लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जान जोखिम में डालकर घुरूड़ी पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
मुनस्यारी। स्वास्थ्य विभाग की टीम घुरूड़ी में आठ लोगों के पॉजीटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी जांच, जरूरी दवा और अन्य लोगों के सैंपल लेने के लिए जान जोखिम में डालकर घुरूड़ी पहुंची।
जब ग्राम प्रधान मुन्नी देवी,फार्मासिस्ट संजय, आशा हेमा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य भगत सिंह मेहरा, ललित गिरी, गोरी नदी में बने लुम्ती पुल पार कर रहे थे। गोरी नदी में तेज बहाव होने के कारण पुल एक ओर झुक गया।
किसी तरह दवा और अन्य सामान को रस्सी के सहारे नदी के उस ओर पहुंचाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि आठ माह पूर्व पुल निर्माण के लिए निविदा पूरी हो गई थी, लेकिन अभी तक पांच प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया है।
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जनता को राहत देने के नाम पर जो हो रहा है वह केवल छलावा है। गोरी नदी के दोनों पाटों के बीच की दूरी आज भी यथावत है। पुल नहीं बनाने की मांग के लिए कई बार लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया, लेकिन पुल निर्माण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
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जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं, लोग लकड़ी के कच्चे पुल के सहारे वर्षाकाल में उफनाती गोरी नदी पार करने के लिए मजबूर हैं।
वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी पर बना लुम्ती-घरूड़ी पुल बह गया था। इस स्थान पर तब मोटर पुल की स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2016 से मोटर पुल का निर्माण शुरू हुआ।
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तीन साल गुजर गए 110 मीटर लंबा मोटर पुल नहीं बन सका है। पुल निर्माण के नाम पर मात्र आधार दीवार बनाकर छोड़ दिया गया है। विगत आठ माहों से पुल निर्माण का कार्य भी बंद कर दिया है।
स्कूली बच्चे ट्राली के सहारे विद्यालय पहुंचते हैं। पांच साल पहले ट्राली से गिरने से एक ग्रामीण की मौत भी हो चुुुकी है। ट्राली से यात्रा करने पर अब तक 25 से अधिक लोग घायल भी हो चुके हैं। इस मामले में अस्कोट लोनिवि के ईई को फोन किया,लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
11 करोड़ 87 लाख हैं स्वीकृत पुल निर्माण के लिए
मुनस्यारी। लुम्ती-घरूड़ी में मोटर पुल के निर्माण के लिए 11 करोड़ 87 लाख रुपये स्वीकृत हैं। डिजायन में गड़बड़ी के कारण अभी तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। पुल नहीं होने लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जान जोखिम में डालकर घुरूड़ी पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
मुनस्यारी। स्वास्थ्य विभाग की टीम घुरूड़ी में आठ लोगों के पॉजीटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी जांच, जरूरी दवा और अन्य लोगों के सैंपल लेने के लिए जान जोखिम में डालकर घुरूड़ी पहुंची।
जब ग्राम प्रधान मुन्नी देवी,फार्मासिस्ट संजय, आशा हेमा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य भगत सिंह मेहरा, ललित गिरी, गोरी नदी में बने लुम्ती पुल पार कर रहे थे। गोरी नदी में तेज बहाव होने के कारण पुल एक ओर झुक गया।
किसी तरह दवा और अन्य सामान को रस्सी के सहारे नदी के उस ओर पहुंचाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि आठ माह पूर्व पुल निर्माण के लिए निविदा पूरी हो गई थी, लेकिन अभी तक पांच प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो पाया है।