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लाखों के चिकित्सा उपकरण हुए खराब
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट, (चंपावत), उत्तराखंड
Updated Sat, 24 Jan 2015 12:03 AM IST
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राजकीय अस्पताल को पीपीपी मोड के तहत शील प्रबंधन के हाथों में सौंपने के बाद राष्ट्रीय कार्यक्रम पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। शुरुआती दौर पर अस्पताल भवन में रंगरोगन कर उसे चमका तो दिया लेकिन अंदर गंदगी का घोर साम्राज्य बना हुआ है। देखरेख के अभाव में अल्ट्रासाउंड मशीन, जनरेटर, इनवर्टर, वेंटिलेटर आदि कई अन्य उपकरण बेकार हो गए हैं।
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शासन की ओर से गर्भवती महिलाओं को सभी सुविधाएं निशुल्क दी जा रही हैं, बावजूद इसके यहां अल्ट्रासाउंड मशीन महीनों से खराब होने के कारण महिलाएं प्राइवेट अस्पताल से अल्ट्रासाउंड करा रही हैं। पिछले 15 माह से एक भी नेत्र चिकित्सा शिविर नहीं लगाया गया है जबकि पहले तीन माह में एक शिविर लगा करता था। पिछले 15 महीने के दौरान शील प्रबंधन को 3.26 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
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हड़ताल के चलते हो रही है गंदगी
लोहाघाट (चंपावत)। चिकित्साधीक्षक डा. आरके गुप्ता का कहना है कि अस्पताल के हालात कुछ बदले हैं, लेकिन मरीजों की संख्या कम होती जा रही है। पीपीपी मोड के स्वच्छता सेवकों की हड़ताल के चलते यहां गंदगी हो गई है।
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अल्ट्रासाउंड मशीन की नई व्यवस्था होगी
लोहाघाट (चंपावत)। पीपीपी मोड के प्रशासनिक अधिकारी अर्पित जायसवाल का कहना है कि पर्यावरण मित्रों द्वारा नाजायज डिमांड की जा रही हैं, जिसके कारण अस्पताल में गंदगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि अल्ट्रासाउंड मशीन की नई व्यवस्था करने जा रहे हैं। वर्तमान में यहां आठ डाक्टर काम कर रहे हैं।