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जहां पानी नहीं वहां भी रोप दिया धान
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी
Updated Tue, 17 Jul 2018 10:21 PM IST
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नाचनी में भूमिगत सिंचाई योजना से रोपाई लगाते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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नाचनी के भैंसखाल ग्राम पंचायत के लोगों को रोपाई के लिए बारिश अथवा सिंचाई नहर पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। गांव के लोगों ने खेतोें में भूमि के नीचे पाइप डालकर मिट्टी की नमी को बरकरार रखा है। इस तकनीक से गांव के 55 हेक्टेयर असिंचित खेतों में धान रोपा गया है। यही तकनीक है जिसका उपयोग इस्राइल भी करता है।
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जनवरी 2017 में भैंसखाल ग्राम पंचायत ने एकीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) के तहत असिंचित भूमि की सिंचाई के लिए इस्राइली तकनीक के आधार पर भूमिगत पेयजल लाइन बिछाने का काम शुरू किया तो परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने भूमिगत सिंचाई योजना का प्रावधान न होने की बात कही। सिंचाई के लिए गूल बनाने को कहा। ग्राम पंचायत भूमिगत पेयजल लाइन बनाने पर अड़ी रहीं।
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बात जलागम के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आई तो अधिकारियों ने भूमिगत पेयजल लाइन को हरी झंडी दे दी। ग्राम्या ने 18 लाख 22 हजार 500 रुपये योजना के लिए मंजूर किए। गांव के लोगों ने 2 लाख 2 हजार 500 रुपये का अंशदान दिया। 20 लाख 25 हजार रुपये में भैंसखाल के किसानों की किस्मत संवारने वाली भूमिगत सिंचाई योजना तैयार हो गई।
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खेतों तक बिछी है पानी की लाइन
ग्राम्या के परियोजना निदेशक सीबी त्रिपाठी ने बताया कि योजना में 50 और 40 एमएम की 4.5 किमी लाइन खेतों तक बिछी है। सात सिंचाई टैंकों का निर्माण किया गया है, जहां से खेतों तक लाइन बिछी है। खेतों में पानी खोलने का सिस्टम लगा है। यह योजना सिंचाई गूल से किफायती है। पाइप लाइन बिछाने में साढ़े चार रुपये से पांच रुपये प्रति मीटर खर्च आ रहा है। गूल में एक मीटर की लागत करीब 1500 रुपये आती है।
पावर ट्रिलर की ली जा रही मदद
धान की रोपाई लगाने के लिए पावर ट्रिलर की मदद ली जा रही है। पावर ट्रिलर से मिट्टी को दलदली बनाया जा रहा है। रोपाई लगाने के लिए खेतों की मिट्टी को बैलों के जरिये दलदला किया जाता है। इस पद्धति से रोपाई लगाने में मानव शक्ति का भी कम से कम उपयोग हो रहा है।