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सात गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरकर निकाला आक्रोश
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पिथौरागढ़ में तेंदुए की दहशत से खौफजदा सात गांव के लोग जीआईसी रोड़ से जूलुस निकालते हुए।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में तेंदुए की दहशत में जीने को मजबूर सात गांवों के लोगों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि तेंदुए के कारण उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया है। दरवाजे पर हर आहट तेंदुए के होने की दहशत का अहसास कराती है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन और वन विभाग तेंदुए को मारता है तो ठीक नहीं तो ग्रामीण स्वयं उसे मार देंगे। तेंदुए ने सितंबर में सुकौली में एक युवक और अक्तूबर में पपदेव क्षेत्र में घास काट रही महिला को मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक बालक को गंभीर रूप से घायल कर दिया है। वन विभाग और कितने लोगों को तेंदुए के हाथों मरते देखना चाहता है। पूर्व विधायक मयूख महर ने भी मंगलवार को डीएफओ कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी।
सोमवार को बड़ौली, पौंण, पपदेव, हुड़ेती, टकाड़ी, दाड़िमखोला, गणकोट के प्रधानों के नेतृत्व में जीआईसी रोड पर कई ग्रामीण एकत्र हुए। उन्होंने जीआईसी से डीएम कार्यालय तक जुलूस निकालकर प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ नारे लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में तेंदुआ लगातार उन पर हमला कर रहा है, लेकिन प्रशासन और वन विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। आतंक के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण दिन में घरों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। गांव के बच्चों का खेलना मुश्किल हो गया है। मवेशियों को घर के बाहर भी घास चराने से कतरा रहे हैं। हर वक्त तेंदुए के हमले का डर लगा रहता है।
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महिलाओं ने कहा कि आखिर हम कब तक जंगली जानवरों का शिकार होते रहेंगे। वह घास काटने जंगल नहीं जा पा रही है। अपने गांव में तेंदुए के डर से कैदियों की तरह रहना पड़ रहा है। प्रशासन और वन विभाग तेंदुए को मारे वरना ग्रामीण उसे मार देंगे। जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। पूर्व विधायक मयूख महर ने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि तेंदुआ किसी को मार रहा है तो किसी को गंभीर घायल कर रहा है। वन विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वर्तमान समय में महिलाएं खेतों में घास काटने और लकड़ियां लेने नहीं जा पा रहा हैं। दिन दहाड़े तेंदुआ किसी पर भी हमला कर रहा है। महर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं खेतों में काम करती हैं तब तक विभाग अपने सशस्त्र प्रहरी उनकी सुरक्षा में लगाए। जिससे वह भय मुक्त होकर कार्य कर सकें। उन्होंने मंगलवार को डीएफओ कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी।
जंगली जानवर के हमले में घायल या मरने होने वाले लोगों को वन विभाग क्षतिपूर्ति देता है। तेंदुए की बढ़ती घटनाओं को लेकर लोगों को भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। यदि कहीं भी कोई ऐसी घटना या जंगली जानवर दिखाई देता है तो उसकी जानकारी प्रशासन और वन विभाग को दें, जिससे समय रहते कार्रवाई की जाए। - आरडी पालीवाल, एडीएम
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ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन और वन विभाग तेंदुए को मारता है तो ठीक नहीं तो ग्रामीण स्वयं उसे मार देंगे। तेंदुए ने सितंबर में सुकौली में एक युवक और अक्तूबर में पपदेव क्षेत्र में घास काट रही महिला को मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक बालक को गंभीर रूप से घायल कर दिया है। वन विभाग और कितने लोगों को तेंदुए के हाथों मरते देखना चाहता है। पूर्व विधायक मयूख महर ने भी मंगलवार को डीएफओ कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी।
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सोमवार को बड़ौली, पौंण, पपदेव, हुड़ेती, टकाड़ी, दाड़िमखोला, गणकोट के प्रधानों के नेतृत्व में जीआईसी रोड पर कई ग्रामीण एकत्र हुए। उन्होंने जीआईसी से डीएम कार्यालय तक जुलूस निकालकर प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ नारे लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में तेंदुआ लगातार उन पर हमला कर रहा है, लेकिन प्रशासन और वन विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। आतंक के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण दिन में घरों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। गांव के बच्चों का खेलना मुश्किल हो गया है। मवेशियों को घर के बाहर भी घास चराने से कतरा रहे हैं। हर वक्त तेंदुए के हमले का डर लगा रहता है।
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महिलाओं ने कहा कि आखिर हम कब तक जंगली जानवरों का शिकार होते रहेंगे। वह घास काटने जंगल नहीं जा पा रही है। अपने गांव में तेंदुए के डर से कैदियों की तरह रहना पड़ रहा है। प्रशासन और वन विभाग तेंदुए को मारे वरना ग्रामीण उसे मार देंगे। जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। पूर्व विधायक मयूख महर ने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि तेंदुआ किसी को मार रहा है तो किसी को गंभीर घायल कर रहा है। वन विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वर्तमान समय में महिलाएं खेतों में घास काटने और लकड़ियां लेने नहीं जा पा रहा हैं। दिन दहाड़े तेंदुआ किसी पर भी हमला कर रहा है। महर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं खेतों में काम करती हैं तब तक विभाग अपने सशस्त्र प्रहरी उनकी सुरक्षा में लगाए। जिससे वह भय मुक्त होकर कार्य कर सकें। उन्होंने मंगलवार को डीएफओ कार्यालय में धरना देने की चेतावनी दी।
जंगली जानवर के हमले में घायल या मरने होने वाले लोगों को वन विभाग क्षतिपूर्ति देता है। तेंदुए की बढ़ती घटनाओं को लेकर लोगों को भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। यदि कहीं भी कोई ऐसी घटना या जंगली जानवर दिखाई देता है तो उसकी जानकारी प्रशासन और वन विभाग को दें, जिससे समय रहते कार्रवाई की जाए। - आरडी पालीवाल, एडीएम