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मजदूरी कर बच्चों को पढ़ा रही बसंती

Sat, 07 May 2016 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
ब्यूरो/अमर उजाला, थल Updated Sat, 07 May 2016 10:50 PM IST
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Wage teaching children Basanti
मजदूरी कर रही बसंती - फोटो : अमर उजाला

42 वर्षीय बसंती देवी की मजदूरी कर बच्चों को पढ़ा रही है। वह अपनी दो बेटियों एवं एक बेटे को अच्छी और उच्च शिक्षा दिलाना चाहती है। बसंती गर्जिला गांव की रहने वाली हैं। 2007 में उनका मकान आपदा की भेंट चढ़ गया। प्रशासन ने उनके परिवार को थल के पंचायतघर में शिफ्ट करा दिया।

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बसंती अपने छोटे-छोटे बच्चों और बीमार पति को लेकर पंचायतघर में इस उम्मीद के साथ रहने आई कि कुछ समय में सरकार और प्रशासन मकान के लिए पैसा और जगह देगी, लेकिन नौ साल बाद भी कुछ नहीं मिला। इस बीच बसंती के पति कुंदन राम ने जरूर साथ छोड़ दिया। 2010 में कुंदन राम की मौत हो गई।
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सरकार ने कई लोगों को इस अवधि में इंदिरा आवास और अटल आवास बांटे, लेकिन बसंती का नाम कभी उस सूची में शामिल नहीं हुआ, लेकिन बसंती ने हिम्मत नहीं हारी और वह दन, कालीन, ऊनी आसन की बुनाई कर घर का खर्चा, तीन छोटे बच्चों की पढ़ाई का खर्च जुटाने लगी। वह लोगों के खेतों में मेहनत-मजदूरी के लिए जाती रहती हैं। यदि किसी ने घर पर दन, कालीन तैयार करने के लिए बुलाया तो वह वहां भी काम कर लेती हैं। बसंती ने अपने बेटे को पढ़ाने के बाद ड्राइविंग की ट्रेनिंग दिलाई और बेटा इस समय ड्राइवर बन गया है।
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बड़ी बेटी बीए फाइनल में और छोटी बेटी कक्षा चार में पढ़ रही है। बसंती ने कहा कि वह बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहती हैं। बसंती को देखकर लगता है कि वह एक संवेदनशील मां की भूमिका बखूबी निभा रही है बच्चों को पिता की कमी कभी महसूस नहीं होने दी।

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