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तीन सरकारें आई पर पेयजल योजना पूरी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:14 PM IST
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डीडीहाट में सड़क के किनारे पड़े पेयजल योजना के पाइप
- फोटो : अमर उजाला
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डीडीहाट के लिए लिफ्ट पेयजल योजना स्वीकृत होने के बाद प्रदेश में तीन दलों की सरकारें आ गई हैं, लेकिन यह योजना अब भी पूरी नहीं हुई है। वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने ठीक विधानसभा चुनाव से पहले डीडीहाट के लिए लिफ्ट पेयजल योजना को मंजूरी दी थी। योजना के लिए 23 करोड़ 28 लाख रुपये मंजूर किए गए। 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में डीडीहाट लिफ्ट योजना के लिए पांच वर्ष के भीतर 10 करोड़ 72 लाख रुपये जारी किए।
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इस राशि से रामगंगा के किनारे टंकी का निर्माण, डीडीहाट नगर क्षेत्र में पांच वितरण टंकियों का निर्माण और कुछ हिस्से में पाइप लाइन बिछाने का काम किया गया। जल निगम ने ठेकेदारों को विश्वास में लेकर एक करोड़ रुपये से अधिक का काम उधार में करवा दिया। पिछले एक साल से योजना का काम धन की कमी के कारण अटका हुआ है।
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जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके पाल का कहना है कि निर्माण का काम ज्यादा लंबा खिंचने के कारण उसकी लागत बढ़ती जा रही है, क्योंकि निर्माण सामग्री की कीमत हर साल बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि शासन से धन मिल जाता है तो सबसे पहले ठेकेदारों की उधार की राशि का भुगतान करना पड़ेगा। उसके बाद ही योजना का काम आगे शुरू हो पाएगा। योजना के पाइप आठ माह से सड़क के किनारे जंक खा रहे हैं।
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केंद्र से भी नहीं मिला धन
क्षेत्रीय विधायक विशन सिंह चुफाल ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कहा था कि लिफ्ट पेयजल योजना का काम पूरा कराने के लिए केंद्र सरकार से धन मिलेगा। उनके इस ऐलान को सात महीने बीत गए हैं, लेकिन अब तक केंद्र की तरफ से एक पैसा नहीं आया है। योजना कब होगी यह बता पाने की स्थिति में कोई नहीं है।
गांव का पानी शहर में पहुंच रहा
डीडीहाट नगर के लिए इस समय 13 प्राकृतिक स्रोतों का पानी एकत्र कर लाया जाता है। एक प्रकार से गांव के पानी पर शहर का डाका पड़ रहा है। भनड़ा, लेकमाल, घिमाली और मिर्थी गांवों में स्थित इन स्रोतों के पानी का उपयोग गांव के लोग नहीं कर पाते। क्योंकि सारा पानी एकत्र कर डीडीहाट पहुंचाया जा रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस ने बताया कि यदि लिफ्ट योजना बन जाती तो प्राकृतिक स्रोतों के पानी पर निर्भरता समाप्त हो जाती और इस पानी का उपयोग गांव के लोग करते। स्रोतों में जुलाई से फरवरी तक पर्याप्त पानी रहता है, लेकिन मार्च से स्रोतों का पानी कम होते ही पेयजल संकट गहराने लगता है। कम से कम आने वाली गर्मियों तक भी स्रोतों के पानी पर निर्भरता समाप्त होने वाली नहीं है।