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दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले के सामने एक और जंग
संजू पंत /अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:33 PM IST
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पूर्व फौजी दामोदर अपनी मां, विकलांग भाई और पोतों के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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1962 और 1965 के युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले बस्तड़ी निवासी 75 वर्षीय पूर्व सैनिक दामोदर भट्ट के सामने परिवार के परवरिश की चुनौती है। 30 जून को आई आपदा में उनके बेटे और बहू की मौत हो गई थी। अब बूढ़ी मां, विकलांग भाई और दो पोतों की परवरिश का जिम्मा उन पर आ गया है। वह इस इलाके को छोड़कर अन्यत्र जाने की स्थिति में नहीं हैं। पूर्व सैनिक दामोदर भट्ट का कहना है कि सरकार उनके लिए एक टिनशेड का निर्माण करा दे तो उसी में रहकर वह जिंदगी बिता लेंगे।
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1965 के युद्ध में दामोदर भट्ट के पैर में गोली लगी थी, जिसकी वजह से उन्हें अब चलने-फिरने में दिक्कत होती है। जब दामोदर भट्ट की उम्र 40 साल की थी, तब उनकी पत्नी चलकला का निधन हो गया था। दामोदर ने अपने इकलौते बेटे शेखर की परवरिश के लिए दूसरी शादी नहीं की। शेखर बड़ा हुआ तो उन्होंने उसकी शादी कर दी। दो पोते भी हो गए। परिवार हंसी खुशी दिन बिता रहा था, लेकिन 30 जून की रात शेखर भट्ट और उसकी पत्नी चंद्रकला की मलबे में दबकर मौत हो गई। 38 वर्षीय शेखर ओगला में एक होटल में काम करते थे। परिवार में उनकी बूढ़ी मां जयंती देवी, विकलांग भाई नेत्र बल्लभ, पोते अमन और पीयूष रह गए हैं।
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इन सभी की परवरिश की जिम्मेदारी पूर्व सैनिक दामोदर पर आ गई है। वह कहते हैं कि विधाता को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के खातिर उन्होंने पत्नी का वियोग सहन किया था, आज आपदा ने उसी बेटे को उनसे छीन लिया। परिवार बिखर गया है। वह कहते हैं कि वह एक ऐसे मंझधार में खड़े हैं जहां से निकलना मुश्किल हो रहा है। सामने दो पोतों का भविष्य दिखता है तो पीछे बूढ़ी मां और विकलांग भाई का दर्द है। दामोदर 18-कुमाऊं रेजीमेंट में सिपाही रहे हैं। वह कहते हैं कि दुश्मन से लड़ते समय हौसला रहता है।
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बहादुरी दिखाने पर पूरी सेना और देश शाबाशी देता है, लेकिन आपदा से लड़ने वाले को न तो कोई शाबाशी मिलती है और न सहानुभूति देने ही कोई आता है। वह कहते हैं कि बुढ़ापे में उनकी ईश्वर जैसे परीक्षा लेने लगा है। अब न घर बचा, न जमीन बची, न संपत्ति बची और न बेटा, न बहू बचे। उनके सामने जिंदगी की नई लड़ाई शुरू हो गई है। दामोदर अभी बस्तड़ी से ढाई किमी दूर सिंगाली में अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे हैं।