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Pithoragarh News: सिस्टम से सवाल पूछ रही आठ गांवों के हक की सड़क
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डामर उखड़ने से बदहाल हुई थल-बलतिर सड़क। संवाद
सीमांत जिले की थल-बलतिर सड़क की हालत ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ गांवों की उम्मीदों को जोड़ने वाली इस रोड पर तीन साल के लंबे इंतजार और लाखों रुपये खर्च से डामरीकरण हुआ था। महज आठ महीने में ही उसकी हकीकत उधड़कर सामने आ गई है।
बलतिर, अलकाथल, जरमालगांव, रतगुवा, सिमल्टा व आसपास के आठ गांवों को जोड़ने वाली यह सड़क अब गड्ढों से पट चुकी है। जगह-जगह से उखड़ा डामर मानो सरकारी दावों की परतें खोल रहा हो। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सरकारी धन का खुला दुरुपयोग है। इस सड़क से हर दिन तीन हजार से अधिक लोग सफर करते हैं। इसी रास्ते से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। बुजुर्ग इलाज के लिए निकलते हैं और ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। गड्ढों और उखड़ी सतह के कारण हर सफर एक जोखिम में बदल चुका है। वाहन चालकों को हर मोड़ पर हादसे का डर सता रहा है। लोगों का कहना है कि यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
रोड़ी बनी जानलेवा
डामर उखड़ने के बाद सड़क पर बिखरी रोड़ी ने खतरे को और बढ़ा दिया है। वाहन फिसल रहे हैं और संतुलन बिगड़ने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीते एक सप्ताह में ही 10 से अधिक दोपहिया वाहन रपट चुके हैं जिनमें कई लोग घायल हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।
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बोले ग्रामीण
सिर्फ आठ महीने के भीतर ही डामर उखड़ने से सड़क बदहाल हो गई है। यह गंभीर लापरवाही है। इस मामले की जांच कर शासन-प्रशासन को जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
जगत सिंह बसेड़ा, बलतिर
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सड़क पर आठ महीने में डामर उखड़ना भ्रष्टाचार का संकेत है। यदि गुणवत्ता सही होती तो ऐसा नहीं होता। प्रशासन को इस सड़क का संज्ञान लेकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
पूरन सिंह भैसोड़ा, बलतिर
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कोट-
सड़क पर डामरीकरण के लिए 50 लाख का प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख अभियंता को भेजा गया है। उम्मीद है जल्द स्वीकृति मिलेगी और सड़क का सुधारीकरण किया जाएगा।
तारा सिंह, सहायक अभियंता, लोनिवि, डीडीहाट
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बलतिर, अलकाथल, जरमालगांव, रतगुवा, सिमल्टा व आसपास के आठ गांवों को जोड़ने वाली यह सड़क अब गड्ढों से पट चुकी है। जगह-जगह से उखड़ा डामर मानो सरकारी दावों की परतें खोल रहा हो। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सरकारी धन का खुला दुरुपयोग है। इस सड़क से हर दिन तीन हजार से अधिक लोग सफर करते हैं। इसी रास्ते से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। बुजुर्ग इलाज के लिए निकलते हैं और ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। गड्ढों और उखड़ी सतह के कारण हर सफर एक जोखिम में बदल चुका है। वाहन चालकों को हर मोड़ पर हादसे का डर सता रहा है। लोगों का कहना है कि यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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रोड़ी बनी जानलेवा
डामर उखड़ने के बाद सड़क पर बिखरी रोड़ी ने खतरे को और बढ़ा दिया है। वाहन फिसल रहे हैं और संतुलन बिगड़ने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीते एक सप्ताह में ही 10 से अधिक दोपहिया वाहन रपट चुके हैं जिनमें कई लोग घायल हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।
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बोले ग्रामीण
सिर्फ आठ महीने के भीतर ही डामर उखड़ने से सड़क बदहाल हो गई है। यह गंभीर लापरवाही है। इस मामले की जांच कर शासन-प्रशासन को जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
जगत सिंह बसेड़ा, बलतिर
सड़क पर आठ महीने में डामर उखड़ना भ्रष्टाचार का संकेत है। यदि गुणवत्ता सही होती तो ऐसा नहीं होता। प्रशासन को इस सड़क का संज्ञान लेकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
पूरन सिंह भैसोड़ा, बलतिर
कोट-
सड़क पर डामरीकरण के लिए 50 लाख का प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख अभियंता को भेजा गया है। उम्मीद है जल्द स्वीकृति मिलेगी और सड़क का सुधारीकरण किया जाएगा।
तारा सिंह, सहायक अभियंता, लोनिवि, डीडीहाट