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पुल के दोनों तरफ लकड़ी की सीढ़ी डालकर हो रही आवाजाही

Sat, 30 Sep 2017 10:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 30 Sep 2017 10:03 PM IST
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The movement of the wooden stairs on both sides of the bridge
खुमती पुल में लकड़ी की सीढ़ी डालकर आवाजाही करते लोग - फोटो : अमर उजाला

धारचूला तहसील के दूरस्थ खुमती गांव को जोड़ने वाले पैदल पुल के दोनों तरफ की दीवारें बहने से लोगों को आवाजाही में मुश्किलें हो रही है। हालांकि, लोगों ने पुल के दोनों ओर लकड़ी की सीढ़ी लगाकर आवाजाही शुरू की है, लेकिन यह सीढ़ियां इतनी खतरनाक हैं कि उसमें चढ़ने के लिए दूसरे व्यक्ति के सहारे की जरूरत पड़ रही है।

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नौ अगस्त को भारी बारिश के दौरान इस पैदल पुल के दोनों तरफ की दीवारें बह गई थी और पुल हवा में लटक गया था। इस पुल की मरम्मत और बही दीवारों को बनाने के लिए लगातार मांग करने के बाद भी जब प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो गांव के लोगों ने टूटी दीवारों के स्थान पर लकड़ी की सीढ़ी लगा दी है। ग्राम प्रधान विमला देवी ने बताया कि इस पुल के रास्ते गांव के लोगों के अलावा स्कूली बच्चे भी आवाजाही करते थे। पुल की दीवारें टूटने से लोगों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया और बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया। कई बार आपदा प्रबंधन विभाग और तहसील प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन पुल की टूटी दीवारों को बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
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उन्होंने कहा कि 28 सितंबर से 20 लोगों ने मिलकर पुल के दोनों तरफ लकड़ी की सीढ़ियां तैयार की। अब पुल के रास्ते आवागमन तो हो रहा है, लेकिन खतरा कम नहीं है। बच्चों को पुल पार कराने के लिए उनके परिजनों को जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अभी ग्राम पंचायत के अन्य गांवों को जोड़ने वाले रास्ते टूटे हुए हैं। उनकी मरम्मत भी श्रमदान से की जाएगी और दो अक्तूबर से गांव के लोग खुद ही इन रास्तों की मरम्मत करेंगे।
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बजानी से पातल जाने वाला पैदल रास्ता बुरी तरह टूटा है। प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने इन रास्तों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया। अब बारिश तो थम गई है, लेकिन लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। प्रधान ने कहा कि जब सारा काम गांव के लोगों को खुद ही करना है तो प्रशासन आपदा राहत के नाम पर हल्ला क्यों करता है।

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