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Pithoragarh: ट्रॉली के सहारे गोल्फा के ग्रामीणों के जीवन की डोर, लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लोग

Mon, 07 Oct 2024 10:45 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Updated Mon, 07 Oct 2024 10:45 AM IST
सार

आलू और राजमा के उत्पादन में अलग पहचान रखने वाले गोल्फा के ग्रामीण आजादी के 77 साल बाद भी रोजाना ट्रॉली के जरिये नदी पार करने के लिए मजबूर हैं। अक्सर तार टूटने की आंशका बनी रहती है। नदी पार करने के लिए ग्रामीणों के पास कोई दूसरा जरिया नहीं है।

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Pithoragarh News: The life of the villagers of Golfa depends on the trolley
ट्राली से आवाजाही करते गोल्फा के ग्रामीण। संवाद

विस्तार

आलू और राजमा के उत्पादन में अलग पहचान रखने वाले गोल्फा के ग्रामीण आजादी के 77 साल बाद भी रोजाना ट्रॉली के जरिये नदी पार करने के लिए मजबूर हैं। अक्सर तार टूटने की आंशका बनी रहती है। नदी पार करने के लिए ग्रामीणों के पास कोई दूसरा जरिया नहीं है। ग्रामीण ट्रॉली के स्थान पर लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।

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तहसील बंगापानी की करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव के लोगों का जीवन संघर्षों से भरा है। यहां मानसूनकाल में आपदा से प्रतिवर्ष सड़क और पैदल मार्ग जगह-जगह ध्वस्त हो जाते हैं। इस कारण यहां के ग्रामीणों को ध्वस्त रास्तों पर राशन सहित रोजमर्रा का सामान पीठ पर लादकर 10 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यहां बहने वाली मोतीघाट गाड़ पर आजादी के 77 और राज्य गठन के 24 साल बाद भी पुल का निर्माण नहीं हुआ है। ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए रोजाना ट्रॉली के जरिये नदी पार करनी पड़ती है।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए ट्रॉली में बैठकर नदी पार करना मुश्किल है। ग्रामीणों के मुताबिक ध्वस्त रास्तों पर आवाजाही करते हुए कई लोग घायल हो चुके हैं। ट्रॉली के स्थान पर लंबे समय से पुल बनाने की मांग उठाई जा रही है। अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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आलू और राजमा नहीं पहुंच पाता बाजार
ग्रामीण पंकज कोरंगा ने बताया कि गांव में प्रतिवर्ष करीब 15000 क्विंटल आलू और 800 से 900 क्विंटल राजमा का उत्पादन होता है। सड़क की दूरी 10 किमी होने से सड़क तक आलू पहुंचाना ग्रामीणों के लिए चुनौती है। रास्ता ठीक होने पर लोग पीठ पर लादकर आलू सड़क तक पहुंचाते हैं। इस बार रास्ता बदहाल होने से आलू गांव में ही सड़ जाएगा। इससे उन्हें नुकसान झेलना पडे़गा। 

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