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महाकाली में समा रही धारचूला की गंदगी

Sun, 26 Mar 2017 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Sun, 26 Mar 2017 11:01 PM IST
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The end of the dirt in Mahakali Darchula
धारचूला में हर गंदे पानी का मुंह महाकाली की ओर - फोटो : अमर उजाला

लगभग 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित कालापानी से निकलने वाली महाकाली में आगे गुंजी से कुटीयांगती नदी और तवाघाट में धौली नदी मिल जाती है। कालापानी से बूंदी के बीच इस नदी में दर्जनों ग्लेशियरों का पानी मिलता है। तवाघाट पहुंचने तक महाकाली का पानी एकदम साफ नजर आता है, लेकिन उससे आगे जैसे ही यह नदी बढ़ती है तो उसके किनारे स्थित सारी आबादी की गंदगी उसमें समाती है। धारचूला में तो हर मोहल्ले के सीवर की गंदगी वर्षों से महाकाली को प्रदूषित कर रही है।

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दोबाट से आगे बढ़ते ही नदी में जगह-जगह सीवर की गंदगी, कचरा, कूड़ा आदि गिरता रहता है। देशभर में नदियों को बचाने का अभियान चल रहा है, लेकिन अब तक महाकाली में कभी कोई स्वच्छता अभियान नहीं चला। बताया गया है कि तपोवन, ग्वालगांव, निगालपानी, बलुवाकोट, जौलजीबी में सारी कस्बे और नगर की गंदगी महाकाली में समाती रहती है। धारचूला बाजार के लगभग हर मोहल्ले के सीवर के पिटों के मुंह महाकाली की तरफ खुले हुए हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जब कभी धारचूला में पेयजल संकट गहराता है तो लोग महाकाली से ही पानी लाकर पीते हैं। मजबूरी के समय लोगों को यह पता नहीं रहता कि नदी में व्यापक स्तर पर गंदगी पटी है।
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नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी श्रीकांत का कहना है कि नदी में गंदगी डालने वालों के खिलाफ अब सख्त कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि पालिका अभियान चलाकर उन लोगों को चिन्हित करेगी जो नदी को गंदा कर रहे हैं। इधर, आम लोगों का कहना है कि नदी को गंदगी से मुक्त करने के लिए सबसे पहले धारचूला में सीवर लाइन का निर्माण किया जाना चाहिए। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि सीवर लाइन निर्माण के लिए शासन से वार्ता की जाएगी। 
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महाकाली का धार्मिक महत्व भी
महाकाली के उद्गम स्थल कालापानी में काली का मंदिर है। नदी के किनारे स्थित जौलजीबी में गोरी के संगम में लोग पवित्र स्नान करते हैं। जौलजीबी में ज्वालेश्वर महादेव मंदिर है। इससे आगे हंसेश्वर मठ है और पंचेश्वर धाम भी महाकाली के ही किनारे स्थित है। धारचूला नगर में भी नदी के किनारे कई छोटे मंदिर हैं।

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