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सातूं-आठूं पर्व पर भी दिखा पलायन का असर
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बेड़ीनाग विकासखंड के गराऊं गांव में पलायन से खाली हो चुकी बाखली।
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। बेहतर शिक्षा, रोजगार और अन्य सुविधाओं के अभाव में पहाड़ के कई गांव खाली हो चुके हैं। प्रसिद्ध लोकपर्व सातूं-आठूं पर्व में भी पलायन का असर साफ दिख रहा है जिन गांवों में पहले सातूं-आठूं पर्व धूमधाम से मनाया जाता था वहां अब सन्नाटा पसरा है। पहले जहां लोग अपने लोक पर्वों को मनाने के लिए महानगरों से छुट्टियां लेकर गांवों में आते थे वहीं अब उनकी संख्या शून्य हो गई है।
पलायन आयोग रिपोर्ट में पहले ही साफ हो चुका है कि पिथौरागढ़ जिले की 41 फीसदी से ज्यादा आबादी पलायन कर चुकी है। हाल ही में जल जीवन मिशन के सर्वे में 58 गांवों के गैर आबाद होने की पुष्टि हुई है। वर्ष 2019 में पिथौरागढ़ जिले में 1600 गांव आबाद थे जहां सातूं-आठूं सहित सभी लोक पर्व धूमधाम से मनाए जाते थे। अब जिले में आबाद गांवों की संख्या घटकर 1542 हो चुकी है। इसकी वजह पलायन कर चुके लोगों के वापस गांव नहीं आना है।
जिले के बेड़ीनाग विकासखंड के 41 गांव और गंगोलीहाट विकासखंड के 17 गांव आबादी विहीन हो गए हैं। लगातार बढ़ रहे पलायन के पीछे बिजली, पानी, सड़क, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का नहीं होना है। हालांकि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कई प्रवासी परिवार सहित गांव आए थे लेकिन संक्रमण कम होते ही वे लोग फिर महानगरों को लौट गए।
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लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आए कई युवा
पिथौरागढ़। जहां एक तरफ सुविधाओं के अभाव में पहाड़ के कई गांव खाली हो चुके हैं वहीं कुछ युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने पहाड़ पर रहकर अपने लोकपर्वों को जीवंत रखा है। ये युवा बुजुर्गों के साथ मिलकर ठुल खेल, झोड़ा चांचरी का गायन कर लोक पर्वों को संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। इनमें से एक हैं लोक संस्कृति के लिए कार्य करने वाले भाव राग नाट्य अकादमी के कैलाश कुमार। कैलाश ने बताया कि वह और उनकी टीम हिलजात्रा एवं लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कई आबाद गांवों में विलुप्त हो चुके हिलजात्रा पर्व को दोबारा मनाया। इसके अलावा वह हिलजात्रा में प्रयोग किए जाने वाले मुखौटों का भी निर्माण कर रहे हैं।
पहाड़ से हो रहे पलायन के कारणों को जानने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों से सर्वे कराया जाएगा। किन कारणों से पलायन हो रहा है और पलायन का असर किन चीजों पर पड़ रहा है आदि बेसिक जानकारियां अधिकारी उपलब्ध कराएंगे जिसके बाद पलायन से खाली हो रहे गांवों के लिए विकास कार्यों को प्रस्तावित किया जाएगा। इसके अलावा लोक पर्वों में कैसे लोगों को वापस लाया जा सके इसके भी प्रयास किए जाएंगे। - डॉ. आशीष चौहान, डीएम पिथौरागढ़।
पहाड़ों से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल आदि को लेकर लगातार पलायन हो रहा है। पलायन का सीधा असर लोकपर्वों पर भी पड़ रहा है। पहले जिन लोकपर्वों की धूम रहती थी अब वह पलायन के कारण कम हो गई है। -हेमा देवी, ग्राम प्रधान धिगतड़ पिथौरागढ़।
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पलायन आयोग रिपोर्ट में पहले ही साफ हो चुका है कि पिथौरागढ़ जिले की 41 फीसदी से ज्यादा आबादी पलायन कर चुकी है। हाल ही में जल जीवन मिशन के सर्वे में 58 गांवों के गैर आबाद होने की पुष्टि हुई है। वर्ष 2019 में पिथौरागढ़ जिले में 1600 गांव आबाद थे जहां सातूं-आठूं सहित सभी लोक पर्व धूमधाम से मनाए जाते थे। अब जिले में आबाद गांवों की संख्या घटकर 1542 हो चुकी है। इसकी वजह पलायन कर चुके लोगों के वापस गांव नहीं आना है।
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जिले के बेड़ीनाग विकासखंड के 41 गांव और गंगोलीहाट विकासखंड के 17 गांव आबादी विहीन हो गए हैं। लगातार बढ़ रहे पलायन के पीछे बिजली, पानी, सड़क, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का नहीं होना है। हालांकि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कई प्रवासी परिवार सहित गांव आए थे लेकिन संक्रमण कम होते ही वे लोग फिर महानगरों को लौट गए।
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लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आए कई युवा
पिथौरागढ़। जहां एक तरफ सुविधाओं के अभाव में पहाड़ के कई गांव खाली हो चुके हैं वहीं कुछ युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने पहाड़ पर रहकर अपने लोकपर्वों को जीवंत रखा है। ये युवा बुजुर्गों के साथ मिलकर ठुल खेल, झोड़ा चांचरी का गायन कर लोक पर्वों को संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। इनमें से एक हैं लोक संस्कृति के लिए कार्य करने वाले भाव राग नाट्य अकादमी के कैलाश कुमार। कैलाश ने बताया कि वह और उनकी टीम हिलजात्रा एवं लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कई आबाद गांवों में विलुप्त हो चुके हिलजात्रा पर्व को दोबारा मनाया। इसके अलावा वह हिलजात्रा में प्रयोग किए जाने वाले मुखौटों का भी निर्माण कर रहे हैं।
पहाड़ से हो रहे पलायन के कारणों को जानने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों से सर्वे कराया जाएगा। किन कारणों से पलायन हो रहा है और पलायन का असर किन चीजों पर पड़ रहा है आदि बेसिक जानकारियां अधिकारी उपलब्ध कराएंगे जिसके बाद पलायन से खाली हो रहे गांवों के लिए विकास कार्यों को प्रस्तावित किया जाएगा। इसके अलावा लोक पर्वों में कैसे लोगों को वापस लाया जा सके इसके भी प्रयास किए जाएंगे। - डॉ. आशीष चौहान, डीएम पिथौरागढ़।
पहाड़ों से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल आदि को लेकर लगातार पलायन हो रहा है। पलायन का सीधा असर लोकपर्वों पर भी पड़ रहा है। पहले जिन लोकपर्वों की धूम रहती थी अब वह पलायन के कारण कम हो गई है। -हेमा देवी, ग्राम प्रधान धिगतड़ पिथौरागढ़।