जिन गांवों में आई आपदा, वह नहीं थे संवेदनशील की सूची में
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जिले के जिन दो गांवों में शुक्रवार सुबह बादल फटने से तबाही मची वह दोनों गांव संवेदनशील की सूची में शामिल नहीं थे। पिछले दिनों राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भूवैज्ञानिकों, समाज विज्ञानियों की जिस टीम को जिले में भेजा था, उसने धारचूला और मुनस्यारी तहसील में 21 संवेदनशील गांव चिन्हित किए थे। इस सूची में मुनस्यारी तहसील के नौलड़ा और डीडीहाट तहसील के बसतड़ी गांव का नाम शामिल नहीं था। मुनस्यारी तहसील के रिगूनिया ग्राम पंचायत में नौलड़ा के नजदीक कुमालगौन तोक को काफी सुरक्षित माना गया था। ठीक इसी तरह बसतड़ी तोक को भी कभी आपदा के नजरिए से संवेदनशील की श्रेणी में रखा ही नहीं गया था।
जब मौसम का अलर्ट जारी होता है तब आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन उन गांवों में ही सतर्कता के निर्देश देता है, जहां पर ऐसे गांवों का चिन्हीकरण हुआ है। शुक्रवार की घटना से प्रशासन भी हैरत में है और उसे अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े हैं। मौसम विभाग का मानना है कि बारिश की रफ्तार किसी खास इलाके में ज्यादा हो जाती है।
बादल फटने की घटना कहां पर होगी, इसका पूर्वानुमान लगाना कठिन है। ऐसे में कोई भी गांव संवेदनशील की श्रेणी में आ सकता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा का कहना है कि संवेदनशील गांवों की संख्या मौसम के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है। इस बीच कई अन्य गांवों में भी खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी होती जा रही है।