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Elections: आखिर क्यों छात्रसंघ चुनाव से दूर भागे छात्र, मतदान करने में रुचि नहीं दिखा रहे स्टूडेंट्स
Wed, 08 Nov 2023 07:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 08 Nov 2023 07:29 PM IST
सार
पिथौरागढ़ कैंपस में लगभग सात हजार की छात्र संख्या है। परिसर में शिक्षा, कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय प्रतिनिधियों में कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा। महज 1800 छात्र-छात्राओं ने ही मतदान में भाग लिया।
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छात्रसंघ चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीमांत पिथौरागढ़ जिले में आज से दो दशक पहले तक छात्र राजनीति हर क्षेत्र में हावी रही थी। 1972 में सीमांत में अलग विश्वविद्यालय के लिए बड़ा आंदोलन चला था। 15 दिसंबर 1972 के आंदोलन के दौरान पिथौरागढ़ मुख्यालय में पुलिस ने छात्रों पर गोलियां चलाई थी, जिसमें छात्र नेता सज्जन लाल साह और एक नेपाल मजदूर सोबन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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छात्र नेता स्व. निर्मल पंडित ने राज्य आंदोलन को ऐसा प्रभावी बना दिया था कि मुलायम सरकार ने रातों रात गिरफ्तार कर फतेहगढ़ जेल पहुंचा दिया था। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें लागू होने के बाद छात्र राजनीति लगातार हाशिए पर जा रही है। हालात यह हैं कि जहां आज से एक दशक पहले छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए बड़ा उत्साह रहता था वहीं अब न तो छात्र चुनाव लड़ने में और न ही मतदान में रुचि दिखा रहे हैं। पिथौरागढ़ जिले में कैंपस सहित आठ राजकीय महाविद्यालय हैं।
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पिथौरागढ़ कैंपस में लगभग सात हजार की छात्र संख्या है। परिसर में शिक्षा, कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय प्रतिनिधियों में कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा। अन्य प्रमुख पदों पर प्रत्याशी तो चुनाव मैदान में उतरे लेकिन मतदान में महज 1800 छात्र-छात्राओं ने ही मतदान में भाग लिया।
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कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों में तो महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे पदों के लिए छात्रों में कोई रुचि नजर नहीं आ रही है। इसका उदाहरण पिथौरागढ़ के सात महाविद्यालय रहे। राजकीय महाविद्यालय गंगोलीहाट में महासचिव, उपाध्यक्ष पद पर किसी ने नामांकन नहीं किया।
गणाई गंगोली में उपाध्यक्ष, छात्रा उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष के पदों पर किसी ने नामांकन नहीं किया। मुवानी महाविद्यालय में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष ही निर्विरोध चुने गए। उपाध्यक्ष, छात्रा उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, सांस्कृतिक सचिव के पद रिक्त रहे।
नारायणनगर महाविद्यालय में अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने के कारण छात्र संघ की कार्यकारिणी बिना अध्यक्ष के गठित हुई है। अन्य सभी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। सांस्कृतिक सचिव के लिए कोई मैदान में नहीं था।
बेड़ीनाग महाविद्यालय में उपाध्यक्ष और छात्रा उपाध्यक्ष के लिए किसी ने नामांकन नहीं किया। मुनस्यारी महाविद्यालय में सचिव, उपाध्यक्ष, छात्रा उपाध्यक्ष, सांस्कृतिक सचिव के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा। राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट में छात्रा उपाध्यक्ष और सांस्कृतिक सचिव के पद खाली रहे।
छात्र राजनीति में पहले आज की तरह बंदिशें नहीं हुआ करती थी। आज लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों ने छात्र राजनीति को एक सांचे में बांधकर रख दिया गया है। छात्र राजनीति की धार कुंद होने से छात्र चुनाव में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। आज से एक दशक पहले तक छात्र बड़े संघर्षों से चुनाव जीतते थे। -विजय वर्द्धन, पूर्व महासचिव पीजी कालेज पिथौरागढ़।