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पिथौरागढ़ में अब ठोस, तरल अवशिष्ट प्रबंधन चलेगा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 24 Jun 2017 10:39 PM IST
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देहरादून में स्वच्छता गौरव सम्मान से नवाजे गए पिथौरागढ़ के ग्राम प्रधान
- फोटो : अमर उजाला
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स्वजल परियोजना के तहत जिले के 690 ग्राम पंचायतों में रहने वाले एक लाख 224 परिवारों के लिए शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसी के साथ यह जिला अब खुले में शौच की प्रथा से मुक्त हो चुका है। स्वजल परियोजना के तहत अब गांवों में ठोस, तरल अवशिष्ट प्रबंधन का कार्यक्रम चलेगा। इसके तहत सर्वे का काम होने लगा है।
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स्वजल परियोजना की ओर से 2012 में कराए गए सर्वे में यह सामने आया था कि 30,741 परिवार अब भी खुले में शौच करते हैं। इन परिवारों के लिए शौचालय निर्माण को व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया। मार्च 2017 में स्वजल परियोजना के रिकार्ड के अनुसार सभी शौचालय बन चुके हैं। स्वजल परियोजना के परियोजना अधिकारी दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि जितने नए शौचालय बनाए गए हैं उन सभी की फोटोग्राफी की जा रही है। अब तक 23 हजार से ज्यादा शौचालयों की फोटोग्राफी कर ऑनलाइन स्वजल परियोजना के निदेशालय को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि अब गांवों में ठोस, तरल अवशिष्ट प्रबंधन का कार्यक्रम चलेगा। लोगों को कूड़ा निस्तारण की जानकारी दी जाएगी और गंदे पानी के निकास की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने दावे के साथ कहा कि अब जिले में कोई भी परिवार खुले में शौच नहीं करता।
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स्रोतों को बचाने के लिए अभियान चलेगा
स्वजल परियोजना के तहत एक बड़ा कार्यक्रम स्रोतों के संरक्षण का भी चलेगा। अब तक 40 प्राकृतिक स्रोतों का सर्वे कर लिया गया है। स्वजल के परियोजना अधिकारी दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि स्रोतों के संरक्षण का यह कार्यक्रम लंबे समय तक चलेगा। हर साल स्रोतों के संरक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा और उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
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राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान मिलने से खुशी
जिले के छह ग्राम प्रधानों को स्वच्छ भारत अभियान के तहत राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान से नवाजा गया है। प्रधानों का यहां पहुंचने पर गांव के लोगों ने स्वागत किया। इनमें कुसौली के प्रधान रघुवीर सिंह, कासनी के सुरेश कसनियाल, रियांसी के टायगर खड़ायत, रूईना के महेश भट्ट, कालासिला के चारू पंत और धारीधमौड़ा के कैलाश जोशी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने गांवों को खुले शौच की प्रथा से मुक्त कराने के लिए दो अक्तूबर 2017 तक का लक्ष्य दिया था लेकिन जिले में खुले में शौच की प्रथा पहले ही समाप्त हो चुकी है।