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पाठ्य सामग्री में शामिल होगी रं बोली
ब्यूरो/अमर उजाला,डीडीहाट / पिथौरागढ़
Updated Sat, 13 Feb 2016 10:50 PM IST
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धारचूला के रं जनजातियों की बोली को जल्दी ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यहां जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में कार्यशाला शुरू हो गई है। कार्यशाला में धारचूला तहसील में कार्यरत 20 शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रदेश के शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि स्थानीय बोलियों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। डीडीहाट डायट को रं बोली के अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जल्दी ही कक्षा छह से लेकर 10 तक के बच्चे अपनी किताबों में रं बोली पर आधारित पाठों को भी पढ़ेंगे।
डायट की प्राचार्य डा. आशा जोशी ने कहा कि सरकार की मंशा है कि बच्चे अपने आसपास की बोली, भाषा के बारे में जानें। ऐसा करने से लुप्त हो रही बोलियों का संरक्षण होगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वह रं बोली के सभी खासियतों को शामिल करने, कठिन शब्दों को सरलतम तरीके से समझने के तरीके सामने रखें। बताया गया कि रं बोली का शब्दकोष तो बना है लेकिन अभी तक इसकी लिपि नहीं बन पाई है।
रं समाज के बुद्धिजीवी भी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। सेवारत विभाग के विभागाध्यक्ष पीएस मेहरा ने कहा कि लोकभाषा का यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा 2005 के आधार पर तैयार किया जाएगा। कार्यशाला प्रभारी डा. सीबी जोशी ने कहा कि दो दिन में रं बोली को पाठ्यक्रम में शामिल करने संबंधी जानकारी को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्दी ही यह सामग्री किताबों में आ जाएगी। कार्यशाला में भागीरथी ह्यांकी, जस्ता तितियाल, नारायणी गर्खाल, पूनम ग्वाल, डीएस ग्वाल, गिरधर रौतेला, कल्पना खैर, हिरंदा कुटियाल समेत कुल 20 अध्यापक भाग ले रहे हैं।
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डायट की प्राचार्य डा. आशा जोशी ने कहा कि सरकार की मंशा है कि बच्चे अपने आसपास की बोली, भाषा के बारे में जानें। ऐसा करने से लुप्त हो रही बोलियों का संरक्षण होगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वह रं बोली के सभी खासियतों को शामिल करने, कठिन शब्दों को सरलतम तरीके से समझने के तरीके सामने रखें। बताया गया कि रं बोली का शब्दकोष तो बना है लेकिन अभी तक इसकी लिपि नहीं बन पाई है।
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रं समाज के बुद्धिजीवी भी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। सेवारत विभाग के विभागाध्यक्ष पीएस मेहरा ने कहा कि लोकभाषा का यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा 2005 के आधार पर तैयार किया जाएगा। कार्यशाला प्रभारी डा. सीबी जोशी ने कहा कि दो दिन में रं बोली को पाठ्यक्रम में शामिल करने संबंधी जानकारी को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्दी ही यह सामग्री किताबों में आ जाएगी। कार्यशाला में भागीरथी ह्यांकी, जस्ता तितियाल, नारायणी गर्खाल, पूनम ग्वाल, डीएस ग्वाल, गिरधर रौतेला, कल्पना खैर, हिरंदा कुटियाल समेत कुल 20 अध्यापक भाग ले रहे हैं।
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