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रई नाले का पानी सूखा, लोगों ने भर दिया कूड़ा
ब्यूराे/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 02 May 2016 10:12 PM IST
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रई नाले का पानी सूखा, लोगों ने भर दिया कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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किसी समय लबालब भरा रहने वाला रई नाला (रईगाड़) सूख गया है। इसमें लोगों के घरों से आने वाला गंदा पानी मिल गया है। कमी को पूरा करने के लिए लोगों ने रईगाड़ को डंपिंग जोन बना दिया है। इसमें नगर का कूड़ा, मिट्टी, मलबा लगातार फेंका जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो रईगाड़ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। यही रई गाड़ आगे चलकर ठुलीगाड़ में मिलती है। ठुलीगाड़ से जिला मुख्यालय के लिए पंपिंग पेयजल योजना बनी है। एक ओर लोग पेयजल के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं दूसरी ओर वर्षों से उनकी प्यास बुझाने वाली छोटी नदियों को समाप्त करने का उनका क्रम थमा नहीं है। सबसे खास बात यह है कि नगर के पास स्थित इस नाले के संरक्षण के लिए कोई भी संगठन आगे नहीं आया है। प्रशासन और नगरपालिका तो ऐसी बातों से हमेशा आंखें बंद रखते हैं।
रई निवासी एडवोकेट रमेश कापड़ी ने बताया कि आज से 20 साल पहले तक रईगाड़ में लबालब पानी भरा रहता था। इस पानी से खेतों की सिंचाई होती थी। रईगाड़ के पानी को साफ माना जाता था। इसका स्रोत मोस्टामानू और मड़धूरा के जंगल में था। इस कारण इसका पानी प्रदूषित नहीं हुआ था। बाद में रईगाड़ के किनारे सैकड़ों की संख्या में मकान बन गए। इन मकानों से सबसे पहला खतरा रईगाड़ को ही हुआ। अब तो यह पूरी तरह सूख चुकी है। श्री कापड़ी ने कहा कि पानी को लेकर हाहाकार में जी रहे लोगों ने अपने प्राकृतिक स्रोतों को बचाने की सुध नहीं ली। इसका परिणाम उनको भोगना पड़ेगा।
कुंडीखोला और रंधौला गाड़ भी समाप्त
नगर के पास बहने वाले कुंडीखोला और रंधौला गाड़ में भी पानी नहीं है। इन दोनों नालों में पहले खूब पानी था। अब यह सूखकर गंदे नाले में तब्दील हो गए हैं। यदि बारिश के समय इन नालों में पानी बहने भी लगे तो उसका किसी भी तरह उपयोग नहीं हो सकता। शहरीकरण की धुन में भाग रहे लोगों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
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रई निवासी एडवोकेट रमेश कापड़ी ने बताया कि आज से 20 साल पहले तक रईगाड़ में लबालब पानी भरा रहता था। इस पानी से खेतों की सिंचाई होती थी। रईगाड़ के पानी को साफ माना जाता था। इसका स्रोत मोस्टामानू और मड़धूरा के जंगल में था। इस कारण इसका पानी प्रदूषित नहीं हुआ था। बाद में रईगाड़ के किनारे सैकड़ों की संख्या में मकान बन गए। इन मकानों से सबसे पहला खतरा रईगाड़ को ही हुआ। अब तो यह पूरी तरह सूख चुकी है। श्री कापड़ी ने कहा कि पानी को लेकर हाहाकार में जी रहे लोगों ने अपने प्राकृतिक स्रोतों को बचाने की सुध नहीं ली। इसका परिणाम उनको भोगना पड़ेगा।
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कुंडीखोला और रंधौला गाड़ भी समाप्त
नगर के पास बहने वाले कुंडीखोला और रंधौला गाड़ में भी पानी नहीं है। इन दोनों नालों में पहले खूब पानी था। अब यह सूखकर गंदे नाले में तब्दील हो गए हैं। यदि बारिश के समय इन नालों में पानी बहने भी लगे तो उसका किसी भी तरह उपयोग नहीं हो सकता। शहरीकरण की धुन में भाग रहे लोगों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
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