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स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 02:12 PM IST
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Products of self-help groups will get new identity
दिनेश अवस्थी (संवाद) पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के आह्वान के बाद सीमांत जिले के 1858 स्वयंं सहायता समूहों के दिन भी बहुरने की उम्मीद है। उत्पादों को सरकारी और बड़ी कंपनियों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इससे उत्पादकों को भी नई पहचान मिलेगी। स्वयंं सहायता समूहों का सालाना टर्न ओवर करीब 60 लाख रुपये है। अब तक स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार नहीं मिल पा रहा है। इससे समूह के सदस्य भी खासे परेशान रहते हैं। अब दीनदयाल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े समूह केंद्र सरकार के जेम पोर्टल में रजिस्टर्ड हो कर अपने उत्पादों की बिक्री करेंगे। पीडी डीआरडीए आशीष पुनेठा ने बताया कि पहले चरण में हैंडलूम उत्पादों को जेम पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। धारचूला ब्लॉक में 90 समूहों के 320 सदस्य हैं। यह दन, कालीन, चुटका, स्वेटर, टोपी, आसन बनाते हैं। एक सदस्य को माह में 1300 रुपया मिल जाता है। फैडरेशन को 20 हजार रुपये लाभ होता है। मुनस्यारी में 70 समूहों के 210 सदस्य हैं। इनका टर्न ओवर करीब 6 लाख रुपये है। सदस्य मांग पर स्वेटर, टोपी बुनकर देते हैं। अभी धारचूला के आठ और मुनस्यारी के तीन समूहों के उत्पादों को जेम पोर्टल में रजिस्टर्ड किया गया है। पोर्टल के माध्यम से जिस सामान की मांग आएगी उसे समूह के जरिए तैयार कराया जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने की तैयारी की जा रही है। हैंडलूम के साथ ही पहाड़ी दाल, राजमा, मसाले भी ग्राहकों को आनलाइन बेचे जाएंगे। जिला स्तर पर सरस बाजार के जरिए भी उत्पादों की बिक्री की जा रही है। कोरोना के चलते भविष्य में आनलाइन बाजार की काफी संभावना है। यदि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलता है तो समूहों की आर्थिकी में इजाफा होगा। इससे अन्य लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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--::: समूहों ने बेचे 87 हजार मास्क :: पिथौरागढ़। कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को मास्क बनाने का काम सौंपा गया। पीडी डीआरडीए आशीष पुनेठा ने बताया कि 40 समूहों ने अब तक 92 हजार मास्क बनाए हैं। इनमें से 87 हजार मास्क विभागों ने खरीदे हैं। 20 रुपये प्रति मास्क में समूहों को दो से पांच रुपये का लाभ मिल रहा है।
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