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संवेदनशील गांवों के विस्थापन के लिए सरकार गंभीर नहीं : ऐरी
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पिथौरागढ़ में उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी पत्रकार वर्ता करते हुए।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने पत्रकार वार्ता कर सरकार से आपदा प्रभावितों का तत्काल पुनर्वास करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरा उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से जोन फाइव और भूस्खलन की दृष्टि से भी काफी संवेदनशील है।
इसके बाद भी सरकार ऐसे गांवों के लोगों का सुरक्षित स्थान में विस्थापन कराने के लिए लेकर गंभीर नहीं है। इस दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं ने खटीमा गोलीकांड की 27वीं वर्षी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
बुधवार को उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने हनुमान मंदिर स्थित कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में तत्कालीन सरकार ने सर्वे कर राज्य में ऐसे 350 गांव संवेदनशील और अतिसंवेदनशील गांवों को चिह्नित किया था।
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तब उक्रांद ने सरकार को ऐसे परिवारों को कोटखड़ाई, बिंदुखत्ता, खसरा वन और आरक्षित वन भूमि में विस्थापित करने का सुझाव दिया था। तत्कालीन सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने जब वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम नरेश से बात की तो उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा। ऐरी ने कहा कि अगर सरकार ने तब प्रस्ताव भेजा होता तो ऐसे परिवारों का विस्थापन हो गया होता।
उन्होंने कहा कि आज ऐसे गांवों की संख्या बढ़कर करीब 600 हो गई है लेकिन सरकार प्रभावितों के पुनर्वास के लिए गंभीर नहीं है। सरकार की लापरवाही के कारण ही जुम्मा गांव और जोशी गांव में लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बने हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर अगर संवेदनशील नहीं है तो जनता को खड़ा होना होगा। उक्रांद इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगी। वहां केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चंद्र शेखर कापड़ी, जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा, रमेश सिंह नारायण सिंह, समरेंद्र सिंह, नरेश ग्वाल, राजू दिगारी आदि थे।
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इसके बाद भी सरकार ऐसे गांवों के लोगों का सुरक्षित स्थान में विस्थापन कराने के लिए लेकर गंभीर नहीं है। इस दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं ने खटीमा गोलीकांड की 27वीं वर्षी पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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बुधवार को उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने हनुमान मंदिर स्थित कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में तत्कालीन सरकार ने सर्वे कर राज्य में ऐसे 350 गांव संवेदनशील और अतिसंवेदनशील गांवों को चिह्नित किया था।
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तब उक्रांद ने सरकार को ऐसे परिवारों को कोटखड़ाई, बिंदुखत्ता, खसरा वन और आरक्षित वन भूमि में विस्थापित करने का सुझाव दिया था। तत्कालीन सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने जब वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम नरेश से बात की तो उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा। ऐरी ने कहा कि अगर सरकार ने तब प्रस्ताव भेजा होता तो ऐसे परिवारों का विस्थापन हो गया होता।
उन्होंने कहा कि आज ऐसे गांवों की संख्या बढ़कर करीब 600 हो गई है लेकिन सरकार प्रभावितों के पुनर्वास के लिए गंभीर नहीं है। सरकार की लापरवाही के कारण ही जुम्मा गांव और जोशी गांव में लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बने हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर अगर संवेदनशील नहीं है तो जनता को खड़ा होना होगा। उक्रांद इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगी। वहां केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चंद्र शेखर कापड़ी, जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा, रमेश सिंह नारायण सिंह, समरेंद्र सिंह, नरेश ग्वाल, राजू दिगारी आदि थे।