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पिथौरागढ़ नगर में लुट रहे हैं किराएदार

Fri, 24 Jun 2016 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 24 Jun 2016 10:53 PM IST
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Pithoragarh town are plundered tenant
पिथौरागढ़ नगर - फोटो : अमर उजाला

नगर में किराए का कमरा प्राप्त करना और मुनासिब कीमत में मिलना अब उतना ही कठिन होता जा रहा है जितना महानगरों में होता है। किराएदार लुट रहे हैं और मकान मालिक टैक्स की चोरी में लगे हैं। अब प्रशासन ऐसे मकान मालिकों की सूची आयकर विभाग को भी सौंपेगा और किराए में लगाए गए मकानों को अतिरिक्त आय में मानकर उनसे इनकम टैक्स की वसूली भी करेगा। कई किराएदारों के इस तरह के मामलों की जानकारी प्रशासन को देने के बाद अब कार्रवाई की तैयारी चल रही है। बताया गया कि किराए के मकानों में चाहे मानक के अनुसार सुविधा हो या न हो लेकिन किराया मनमाना तय किया जाता है।

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नगर में करीब 12 हजार मकान हैं। यहां पर मकानों को किराए पर देना एक व्यवसाय बना है, लेकिन आयकर विभाग ने कभी भी मकान मालिक से किराए से होने वाली आमदनी की न तो जानकारी हासिल की है और न किसी मकान मालिक ने इसका ब्योरा अपने स्तर से आयकर विभाग को दिया है। हर साल मकान के किराए की राशि में 20 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो जाती है। ज्यादातर मकान मालिकों ने किराए की इस राशि को अपनी आय में दर्शाया ही नहीं है। 
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अब हर मकान का ब्योरा तैयार होगा
एसडीएम सदर अनुराग आर्य ने बताया कि अब नगर क्षेत्र के हर भवन का ब्योरा तैयार होगा और यह जांच की जाएगी कि उसमें कितने किराएदार रहते हैं। उन्होंने कहा कि निजी भवन स्वामियों को किराए की राशि उतनी ही लेनी होगी, जितनी सरकारी दफ्तरों के लिए मानक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सर्वे जल्दी होगा और हर भवन से होने वाली आय की जानकारी ली जाएगी।
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किराए के मकान का टैक्स अलग से
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी ने बताया कि अक्सर मकान मालिक किराए में लगाए गए कमरों का सही ब्योरा नहीं देते। यह टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मकान में एक कमरा किराए में है तो उसके लिए भवन कर का निर्धारण 186 रुपये किया जाता है। यदि किसी ने एक कमरे का उपयोग निजी आवास के लिए किया है तो उससे 96 रुपये हाउस टैक्स लिया जाता है। अधिशासी अधिकारी ने बताया कि कोई भी मकान मालिक किराएदारों की संख्या और किराए के कमरों का सही ब्योरा नहीं देता। इस कारण बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी हो जाती है।


किराए का भुगतान चेक के जरिए करें
प्रशासन और नगरपालिका का किराएदारों से आग्रह है कि वह हर माह किराए की राशि का भुगतान चेक से करें। नकद राशि के भुगतान में बैंक से डिटेल नहीं मिलती और इसका कोई रिकार्ड भी नहीं होता। यह भी कहा गया है कि किराए का कमरा लेने से पहले उसमें सुविधाओं को जुटाने के लिए भी मकान मालिक से कहें।

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