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आज 56 साल का हो जाएगा पिथौरागढ़ जिला
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Wed, 24 Feb 2016 12:17 AM IST
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आज पिथौरागढ़ जिला 56 साल का हो गया है। 24 फरवरी 1960 को चमोली और उत्तकाशी जिले के साथ अस्तित्व में आए इस जिले के अधिकांश हिस्से असुविधाओं की मार झेल रहे हैं। इससे पलायन को बढ़ावा मिला है, गांव खाली हो रहे हैं।
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यूपी के समय अल्मोड़ा जिले से अलग कर सामरिक लिहाज से गठित इस जिले को 56 साल में विकास की जो गति मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। असुविधाओं की मार से गांव खाली हो गए हैं। थल से 6 किमी दूर भकुंडा का ही उदाहरण ले लीजिए, इस गांव में 1983 से पहले 15 परिवार रहते थे लेकिन आज एक भी परिवार गांव में नहीं रहता।
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हर गांव में वीरान पड़े मकानों से पलायन की विभीषिका का अंदाजा लगाया जा सकता है। चीन और नेपाल से सटे इस इलाके को देश की सुरक्षा के लिहाज से भी सुविधाओं से लैस करने की दरकार है, ताकि सीमांत के गांवों में मानवों की मौजूदगी बरकरार रहे।
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चीन के साथ संबंधों में आई खटास के बाद भारत सरकार ने चीन सीमा से सटे इस इलाके में सड़कों के निर्माण पर ध्यान देना प्रारंभ किया। वर्ष 1960 में धारचूला से 17 किमी आगे तवाघाट तक सड़क बनी। 30 साल तक फिर सड़क के विस्तार पर ब्रेक लगा रहा।
वर्ष 1992 में तवाघाट से चीन सीमा लिपुपास तक तवाघाट-लिपुपास राष्ट्रीय राजमार्ग नाम से 85 किमी सड़क मंजूर हुई। इन 24 सालों में तवाघाट से गर्भाधार तक 35 किमी, गुंजी से कालापानी 9 किमी, गर्ब्यांग से गुंजी 10 किमी सड़क बनी है। गर्भाधार से बूंदी तक 27 किमी हिस्से में एक इंच भी सड़क नहीं कटी है।
पिथौरागढ़। धारचूला की व्यास घाटी के 7 गांव बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रांगकांग कूटी को सरकारें आज तक बिजली उपलब्ध नहीं करा पाई हैं। ये गांव उरेडा की वैकल्पिक व्यवस्था से रोशन होते हैं। सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं।
सीमांत केचौदांस घाटी के 14 गांव, दारमा के 16 गांव और व्यास घाटी के 7 गांवों में आज भी फोन सुविधा उपलब्ध नहीं है। तीनों घाटियों के हर गांव में एक-एक डिजीटल सेटेलाइट फोन लगे हैं।
चौंदास 14 गांवों के साथ ही व्यास घाटी के गर्ब्यांग और गुंजी गांवों के लोग नेपाली फोन सेवा का उपयोग करते हैं। इससे लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।