{"_id":"5dc6edc68ebc3e5b715efb65","slug":"people-are-returning-to-their-soil-pithoragarh-news-hld363409097","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखद : लौटने लगे हैं लोग अपनी माटी की ओर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखद : लौटने लगे हैं लोग अपनी माटी की ओर
विज्ञापन
गणाई गंगोली के कोलू भैर गाँव में पैतृक मकान में दिवाली मनाते लोग।
- फोटो : PITHORAGARH
देर से ही सही, लेकिन लोग अपने गांव की तरफ लौटने लगे हैं। गणाईगंगोली के कोलूभैर गांव में लोग अपने पुराने खंडहर हो चुके मकानों को पुनर्जीवित करने लगे हैं। 18 वर्ष पूर्व गांव छोड़ चुके एक परिवार ने शुक्रवार को परिवार के साथ अपने पुश्तैनी घर में बूढ़ी दिवाली मनाई।
पलायन से खाली हुए कोलूभैर गांव को फिर से आबाद करने की मुहिम गांव के लोगों ने छेड़ी है। इस कार्य में शिक्षक हरीश कोठारी का अहम योगदान रहा है। हरीश कोठारी का परिवार 18 वर्ष पहले वर्ष 2001 में गांव से पलायन कर हल्द्वानी में रहने लगा था। शिक्षक हरीश कोठारी गणाईगंगोली के स्थानीय विद्यालय में कार्यरत थे। 3 वर्ष पहले शिक्षक हरीश कोठारी का भी स्थानांतरण हल्द्वानी हो गया। वह भी परिवार के साथ हल्द्वानी में रहने लगे। हाल में वह स्थानांतरित होकर ग्वाड़ी के प्राथमिक विद्यालय में आ गए। उन्होंने अपने परिवार को भी गांव में लाने का निर्णय लिया और परिवार के साथ कोलूभैर गांव लौट आए।
दीपावली के बाद पड़ने वाली देवोत्थानी एकादशी को कुमाऊं में बूढी़ दिवाली के नाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर घरों को दीपों से रोशन किया जाता है। इस बार की बूढ़ी दिवाली शिक्षक हरीश कोठारी के परिवार ने अपने पैतृक मकान में मनाई। घर को सजाया गया। दीयों से रोशनी की गई। कोठारी गांव के अन्य लोगों को भी वापस गांव में आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन
दिवाली पर कई लोग लौटे हैं गांव
गणाईगंगोली। गांव के लोगों की घर वापसी की मुहिम का ही असर कहेंगे कि इस बार दिवाली में गांव से पलायन कर चुके 15 लोग गांव लौटे। 45 वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर चुके ओमप्रकाश कोठारी कोलूभैर में अपने पुश्तैनी मकान का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। कुछ अन्य परिवारों ने भी अपने मकानों की मरम्मत करने की इच्छा जाहिर की है। दिवाली पर सेवानिवृत्त शिक्षक मथुरा दत्त कोठारी परिवार के साथ लखनऊ से गांव आए हैं। सार्वजनिक कार्यों में अग्रणी रहे डाक कर्मी तारा दत्त कोठारी और सामाजिक कार्यकर्ता धर्मानंद कोठारी इस मुहिम को धार दे रहे हैं। ज्ञात हो कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य डीके शर्मा इसी गांव के मूल निवासी हैं। गांव के कई लोग उच्च पदों पर आसीन हैं। गांव के लोग चाहते हैं कि यह सभी लोग वापस गांव लौटें। कोलूभैर के लोगों की यह मुहिम सफल हुई तो अन्य गांवों पर भी इसका असर पड़ेगा। पहाड़ों के वीरान हो चुके गांवों में रौनक लौटेगी।
विज्ञापन
पलायन से खाली हुए कोलूभैर गांव को फिर से आबाद करने की मुहिम गांव के लोगों ने छेड़ी है। इस कार्य में शिक्षक हरीश कोठारी का अहम योगदान रहा है। हरीश कोठारी का परिवार 18 वर्ष पहले वर्ष 2001 में गांव से पलायन कर हल्द्वानी में रहने लगा था। शिक्षक हरीश कोठारी गणाईगंगोली के स्थानीय विद्यालय में कार्यरत थे। 3 वर्ष पहले शिक्षक हरीश कोठारी का भी स्थानांतरण हल्द्वानी हो गया। वह भी परिवार के साथ हल्द्वानी में रहने लगे। हाल में वह स्थानांतरित होकर ग्वाड़ी के प्राथमिक विद्यालय में आ गए। उन्होंने अपने परिवार को भी गांव में लाने का निर्णय लिया और परिवार के साथ कोलूभैर गांव लौट आए।
विज्ञापन
दीपावली के बाद पड़ने वाली देवोत्थानी एकादशी को कुमाऊं में बूढी़ दिवाली के नाम से मनाया जाता है। इस पर्व पर घरों को दीपों से रोशन किया जाता है। इस बार की बूढ़ी दिवाली शिक्षक हरीश कोठारी के परिवार ने अपने पैतृक मकान में मनाई। घर को सजाया गया। दीयों से रोशनी की गई। कोठारी गांव के अन्य लोगों को भी वापस गांव में आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन
दिवाली पर कई लोग लौटे हैं गांव
गणाईगंगोली। गांव के लोगों की घर वापसी की मुहिम का ही असर कहेंगे कि इस बार दिवाली में गांव से पलायन कर चुके 15 लोग गांव लौटे। 45 वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर चुके ओमप्रकाश कोठारी कोलूभैर में अपने पुश्तैनी मकान का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। कुछ अन्य परिवारों ने भी अपने मकानों की मरम्मत करने की इच्छा जाहिर की है। दिवाली पर सेवानिवृत्त शिक्षक मथुरा दत्त कोठारी परिवार के साथ लखनऊ से गांव आए हैं। सार्वजनिक कार्यों में अग्रणी रहे डाक कर्मी तारा दत्त कोठारी और सामाजिक कार्यकर्ता धर्मानंद कोठारी इस मुहिम को धार दे रहे हैं। ज्ञात हो कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य डीके शर्मा इसी गांव के मूल निवासी हैं। गांव के कई लोग उच्च पदों पर आसीन हैं। गांव के लोग चाहते हैं कि यह सभी लोग वापस गांव लौटें। कोलूभैर के लोगों की यह मुहिम सफल हुई तो अन्य गांवों पर भी इसका असर पड़ेगा। पहाड़ों के वीरान हो चुके गांवों में रौनक लौटेगी।