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Pithoragarh News: पुरानी बसें, टूटी खिड़कियां लेती हैं ठंड में यात्रियों की परीक्षा
Sat, 22 Nov 2025 11:20 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 22 Nov 2025 11:20 PM IST
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पिथौरागढ़ डिपो की बस में खिड़की का टूटा शीशा। संवाद
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पिथौरागढ़। जिले में ठंड बढ़ने लगी है। सुबह-शाम कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। ऐसे में बदहाल रोडवेज बसों में सफर करना यात्रियों के लिए चुनौती से कम नहीं है। कई बसों में खिड़कियों के शीशे क्षतिग्रस्त हैं। वहीं पैकिंग निकलने से भीतर आने वाली सर्द हवाएं यात्रियों की दिक्कतें बढ़ा रही हैं। हैरानी है कि कागजों में सब कुछ चकाचक है और निगम यात्रियों का सफर आरामदायक बनाने के दावे कर रहा है।
पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में 84 बसें शामिल हैं। हर रोज डिपो दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, बरेली, टनकपुर, हल्द्वानी, धारचूला, थल आदि रूटों पर 19 बसों का संचालन करता है। बसों में रोजाना तीन हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। परिवहन निगम बसों में आरामदायक सफर के दावे कर रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी ने ठंड के मौसम में इन दावों की पड़ताल करने के लिए कुछ बसों में सफर किया तो हकीकत सामने आई।
डिपो के बेड़े में शामिल 25 से अधिक बसें यात्रियों को आराम कम और दर्द अधिक दे रही हैं। इन बसों की खिड़कियों के कई शीशे क्षतिग्रस्त हैं तो कई खिड़कियों में शीशे की पैकिंग गायब है। चिटकनी क्षतिग्रस्त होने से सुरक्षित शीशों में भी छेद बन गए हैं। ऐसे में ये खिड़कियां सर्द हवाओं को भीतर घुसने से रोकने में नाकाम साबित हो रहीं हैं और यात्री कड़ाके की ठंड में ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। परिचालकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि क्षतिग्रस्त खिड़कियों को ठीक करने का काम निगम का है। हम इसमें क्या कर सकते हैं। उन्होंने माना कि यात्रियों को सर्दी के मौसम में सफर करने में दिक्कत होती है।
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बसों की बॉडी भी क्षतिग्रस्त
डिपो के बेड़े में सिर्फ 21 बसें नई हैं। 63 बसें पुरानी और खटारा हो चुकी हैं। इन बसों की बॉडी जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से भीतर सर्द हवाएं घुस रहीं हैं। बॉडी में जगह-जगह छेद बने हैं लेकिन निगम की इन पर नजर नहीं पड़ रही है। सर्द हवाओं के साथ ही क्षतिग्रस्त शीशे और बॉडी से उठती आवाज भी यात्रियों को परेशान कर रही है।
10 बस वर्कशॉप में खड़ीं
बेड़े में शामिल अधिकांश बसें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं और अब इनमें आए दिन खराबी आती रहती है। खराब हुईं 10 बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। हैरानी है कि इनकी खराबी को दूर करने के लिए डिपो को स्पेयर पार्ट्स भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में डिपो के लिए विभिन्न रूटों पर सीमित बसों का संचालन करना मजबूरी बना हुआ है।
कोट
बसों की समय-समय पर फिटनेस की जाती है। क्षतिग्रस्त शीशे भी बदले जाते हैं। जो शीशे और पैकिंग क्षतिग्रस्त हुई हैं उन्हें जल्द बदला जाएगा। निगम यात्रियों का सफर आरामदायक बनाने के लिए गंभीर है। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में 84 बसें शामिल हैं। हर रोज डिपो दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, बरेली, टनकपुर, हल्द्वानी, धारचूला, थल आदि रूटों पर 19 बसों का संचालन करता है। बसों में रोजाना तीन हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। परिवहन निगम बसों में आरामदायक सफर के दावे कर रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी ने ठंड के मौसम में इन दावों की पड़ताल करने के लिए कुछ बसों में सफर किया तो हकीकत सामने आई।
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डिपो के बेड़े में शामिल 25 से अधिक बसें यात्रियों को आराम कम और दर्द अधिक दे रही हैं। इन बसों की खिड़कियों के कई शीशे क्षतिग्रस्त हैं तो कई खिड़कियों में शीशे की पैकिंग गायब है। चिटकनी क्षतिग्रस्त होने से सुरक्षित शीशों में भी छेद बन गए हैं। ऐसे में ये खिड़कियां सर्द हवाओं को भीतर घुसने से रोकने में नाकाम साबित हो रहीं हैं और यात्री कड़ाके की ठंड में ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। परिचालकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि क्षतिग्रस्त खिड़कियों को ठीक करने का काम निगम का है। हम इसमें क्या कर सकते हैं। उन्होंने माना कि यात्रियों को सर्दी के मौसम में सफर करने में दिक्कत होती है।
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बसों की बॉडी भी क्षतिग्रस्त
डिपो के बेड़े में सिर्फ 21 बसें नई हैं। 63 बसें पुरानी और खटारा हो चुकी हैं। इन बसों की बॉडी जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से भीतर सर्द हवाएं घुस रहीं हैं। बॉडी में जगह-जगह छेद बने हैं लेकिन निगम की इन पर नजर नहीं पड़ रही है। सर्द हवाओं के साथ ही क्षतिग्रस्त शीशे और बॉडी से उठती आवाज भी यात्रियों को परेशान कर रही है।
10 बस वर्कशॉप में खड़ीं
बेड़े में शामिल अधिकांश बसें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं और अब इनमें आए दिन खराबी आती रहती है। खराब हुईं 10 बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। हैरानी है कि इनकी खराबी को दूर करने के लिए डिपो को स्पेयर पार्ट्स भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में डिपो के लिए विभिन्न रूटों पर सीमित बसों का संचालन करना मजबूरी बना हुआ है।
कोट
बसों की समय-समय पर फिटनेस की जाती है। क्षतिग्रस्त शीशे भी बदले जाते हैं। जो शीशे और पैकिंग क्षतिग्रस्त हुई हैं उन्हें जल्द बदला जाएगा। निगम यात्रियों का सफर आरामदायक बनाने के लिए गंभीर है। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़