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आपदा के दस माह बाद न पुनर्वास और न सुरक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sat, 20 May 2017 10:50 PM IST
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आमथल में पिछले वर्ष की आपदा से ध्वस्त मकान
- फोटो : amar ujala
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आपदा से पीड़ित लोगों के प्रति सरकार और प्रशासन का रवैया किस तरह का रहता है, यह आमथल के आपदा पीड़ितों की व्यथा देखकर सामने आता है। 30 जून 2016 को आई आपदा से आमथल में देवकी देवी का मकान टूट गया था। उनके आंगन में मलबा पटने से आवाजाही भी कठिन हो गई। आपदा के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने देवकी को आश्वासन दिया था उसके लिए नया मकान बनाया जाएगा, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद कोई भी देखने के लिए नहीं आया।
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देवकी ने बताया कि आपदा के बाद से वह दूसरे के मकान में शरण लेकर रह रही हैं। उनको यह उम्मीद थी कि शायद सरकार मकान बनाने के लिए धनराशि मंजूर करेगी, लेकिन तात्कालिक सहायता के नाम पर पांच हजार रुपये देने के बाद अधिकारियों ने किसी प्रकार की मदद नहीं दी। उन्होंने कहा कि मकान के आंगन की दीवार टूट गई। मकान का एक हिस्सा आपदा की भेंट चढ़ गया। अब तक प्रशासन ने मलबा तक नहीं हटाया है। वह कहती हैं कि इस बार हुई बारिश के समय मकान में फिर से पानी भरने लग गया और मकान किसी भी समय ध्वस्त हो सकता है।
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देवकी बताती हैं कि इस मामले को जिलाधिकारी के सामने रखना चाहती है लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से 60 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जा पाना संभव नहीं है। थल के तहसीलदार रघुवीर सिंह का कहना है कि आपदा पीड़ित को मकान दिलाने का प्रस्ताव बनाकर पिछले साल ही डीएम को दे दिया गया था। शासन से मंजूरी मिलने पर देवकी का मकान बनाने के लिए धनराशि दी जाएगी।
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आमथल जाने वाले रास्तों की मरम्मत नहीं
आपदा के समय टूटे आमथल जाने वाले रास्तों की अब तक मरम्मत नहीं हो पाई है। स्कूली बच्चे और गांव के लोग जानजोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। गांव के लोगों का कहना है कि आपदा मद में आने वाली धनराशि का कहां उपयोग होता है, इसका पता नहीं है। वास्तविक प्रभावित को कभी कोई राहत नहीं मिल पाती।