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Pithoragarh News: मानसून विदा होकर चला गया, ग्रामीणों की आपदा जस की तस

Thu, 19 Oct 2023 10:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Thu, 19 Oct 2023 10:47 PM IST
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Monsoon has gone, the distress of the villagers remains the same
खतरनाक पैदल मार्ग से सामान के साथ जाती आलम गांव की महिलाएं। संवाद
पिथौरागढ़। जिले की 15 हजार से अधिक की आबादी के लिए मानसून, गर्मी, सर्दी आदि के कोई मायने नहीं। उनके लिए सभी मौसम एक जैसे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी परेशानी हर मौसम में एक जैसी होती है, सुनने वाले उसे अनसुना कर देते हैं, देखने वाले अनदेखा कर देते हैं। मानसून में उनके रास्ते बंद क्या हुए, खुलने का नाम नहीं ले रहे हैं। परेशानियों का आलम ऐसा कि सब कुछ ठहर सा गया है। इसी मजबूरी में उन्हें जिंदगी की जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
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मानसूनकाल शुरू होते समय ग्रामीण क्षेत्र की सात सड़कों सहित जिले की आठ सड़कें बंद हो गईं थीं। पूरी बरसात लोग जैसे-तैसे जिंदगी की गाड़ी को चलाते रहे। उम्मीद यह थी कि मानसून के बाद शायद उनकी सड़कें खुल जाएंगी मगर अब तक ऐसा नहीं हो सका है। कोई पांच किमी पैदल चलने को मजबूर है तो कोई 12 किमी की खड़ी चढ़ाई नाप रहा है। संवाद
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ये सड़कें हुई थीं बंद
छिरकिला-जम्कू

बांसबगड़-कोटापंद्रपाला

तवाघाट-थानीधार

सिंगाली-बस्तड़ी

देवीसूना-खेतारकन्याल

जौलजीबी-मदकोट-कौली कन्याल
डीडीहाट-आदिचौरा-हुनेरा

सोबला-दर-तिदांग

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ग्रामीणों की पीड़ा
- ग्रामीणों को राशन सहित अन्य जरूरी सामान पीठ पर रखकर ढोना पड़ रहा है

-किसी के बीमार पड़ने या किसी गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर डोली से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है।

-देवीसूना से कौली गराली को जाने वाली 21 किलोमीटर लंबी सड़क पर अभी तक पुल नहीं बने हैं। ग्रामीणों को नालों में जूते-चप्पल उतारकर आवाजाही करनी पड़ती है।
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आलम गांव के लोगों के दर्द को भी समझिए
बंगापानी तहसील का आलम गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ पाया है। इस गांव के लोग सेराघाट से तीन-चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर गांव तक पहुंचते हैं। चार महीने पहले गांव को जाने वाला पैदल रास्ता भूस्खलन के कारण बह गया था। रोखड़ में बदले इस रास्ते का कोई सुधलेवा नहीं है। ग्रामीणों ने खुद रास्ते को दुरुस्त कर चलने लायक बनाया है। देवेंद्र सिंह धामी और चंद्र सिंह धामी ने बताया कि किसी के बीमार पड़ने पर डोली ले जाने लायक भी रास्ता नहीं है। ऐसे में मरीज को पीठ पर रखकर सेराघाट सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। गांव के लोग राशन भी इसी मार्ग से होकर गांव तक ले जाते हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह रास्ता किसी खतरे से कम नहीं है। असुविधा के कारण 20 परिवार या मदकोट में रह रहे हैं। 25 परिवार अभी गांव में रह रहे हैं।




डीएम बोलीं

भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें कई स्थानों पर पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं। सड़कों के सुधार के लिए संबंधित विभागों की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही सड़कों का सुधार कर लिया जाएगा। -रीना जोशी, जिलाधिकारी पिथौरागढ़।

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