फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Mahakali trend towards Nepal

महाकाली का रुख अब नेपाल की ओर

Sat, 15 Oct 2016 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Sat, 15 Oct 2016 10:27 PM IST
विज्ञापन
Mahakali trend towards Nepal
महाकाली में पट रहा खोतिला भूस्खलन के साथ निकला मलबा - फोटो : अमर उजाला

खोतिला कस्बे के आसपास के क्षेत्र में बनी दरारें शुक्रवार रात दरक गई। इससे भारी भूस्खलन हुआ और सारा मलबा नेपाल और भारत की सीमा को निर्धारित करने वाली महाकाली नदी में पट गया है। महाकाली में भारी मात्रा में मलबा जमा होने से नदी का रुख नेपाल की तरफ हो गया है। धारचूला के पास घटधार मोहल्ला भी भूस्खलन की जद में है। खोतिला जाने वाले पैदल रास्ते मलबे के साथ तबाह हो गए हैं। 

विज्ञापन


खोतिला कस्बे के आसपास के इलाकों में ठीक 15 दिन पहले भारी भूकटाव हुआ था। यह स्थिति नियंत्रित होने के बजाय ज्यादा बढ़ती गई। शुक्रवार रात जितने हिस्से में दरारें पड़ी थीं, वह एक-एक कर भूस्खलन के रूप में तब्दील हो गई। खोतिला के लोगों ने बताया कि रात करीब एक बजे भूस्खलन के कारण धरती हिलने लगी। क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय सिंह और समाजसेवी कृष्ण सिंह नपलच्याल के मुताबिक जमीन काफी कमजोर हो चुकी है और मलबा लगातार गिर रहा है। पेयजल लाइन के टूटने से कस्बे में फिर से पानी की किल्लत होने लगी है।
विज्ञापन


खोतिला कस्बे के लिए धारचूला के टीवी टावर के पास से पैदल रास्ता तत्काल न बना तो गांव अलग-थलग पड़ जाएगा। खोतिला जाने वाले दोनों रास्ते टूट चुके हैं। भूस्खलन इतना ज्यादा है कि प्रशासन तात्कालिक रूप से बचाव के कदम उठा सकने की स्थिति में भी नहीं है। कुछ दिनों से लगातार हो रहे भूस्खलन से धारचूला कस्बा भी खतरे की जद में है। तहसीलदार आईबी मल्ल ने बताया कि खोतिला की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस समय खेतों में मलबा पटा है, लेकिन कोई मकान खतरे में नहीं आया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भूस्खलन के कारण नहीं बना रास्ता
प्रदेश के लोनिवि सचिव अरविंद ह्यांकी ने पिछले दिनों भूस्खलन प्रभावित खोतिला का दौरा किया। उन्होंने लोनिवि को आदेश दिए कि खोतिला के लिए पैदल रास्ते का निर्माण किया जाए, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण लोनिवि को रास्ता बनाने की हिम्मत नहीं हो रही है। यदि जल्दी रास्ता नहीं बनता तो लोगों को चार किलोमीटर जंगल के रास्ते से घूमकर आना पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed