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वोटों से नेताओं की झोली भरते हैं, अपनी झोली अब भी खाली
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गंगोलीहाट(पिथौरागढ़)। चुनाव में प्रत्याशियों की झोली वोटों से भरने वाली बेलपट्टी क्षेत्र की 10 हजार से अधिक की आबादी आजादी के 74 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड के गठन के बाद कांग्रेस और भाजपा ने बारी-बारी से अपने दो-दो कार्यकाल पूरे किए। हर चुनाव में वोट के लिए इन गांवों में आने वाले नेता विकास का वादा तो करते रहे लेकिन चुनाव के बाद नेताओं ने इस क्षेत्र की ओर नहीं देखा। बेलपट्टी के अधिकतर गांवों में सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। बीते साल 12 किलोमीटर सड़क के कई गांव के लोगों को छह महीने से अधिक समय तक आंदोलन करना पड़ा। इस संघर्ष के बाद भी उन्हें पांच किलोमीटर सड़क की ही सैद्धांतिक स्वीकृति मिल पाई। ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक दलों ने उन्हें महज वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।
सुरखाल पाठक, चमलेख, कोलिया, गानूरा, वहेल कोर्ट, गंतोला, अनर गांव, तल्ला खोलिया और मल्ला खोलिया गांव बेलपट्टी क्षेत्र में स्थित हैं। इन गांवों में 10 हजार से अधिक की आबादी रहती है लेकिन आज तक यह गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं।
सड़क नहीं होने से इन गांवों के लोगों को पांच से 12 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बीमार, गर्भवती, बुजुर्गों के लिए पैदल रास्तों से यह दूरी नापना आसान नहीं होता है। ऐसे में उन्हें डोली से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
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सुरखाल पाठक गांव तक सड़क निर्माण की मांग के लिए ग्रामीणों को 151 दिन तक क्रमिक अनशन और उसके बाद एक माह तक आमरण अनशन करना पड़ा। इसके बाद उन्हें सड़क निर्माण का आश्वासन मिला। वर्षों से विकास के नाम पर मिल रहे आश्वासनों के कारण दर्जनों परिवार पलायन कर चुके हैं। संवाद
बच्चों के लिए आसान नहीं है शिक्षा प्राप्त करना
गंगोलीहाट। बेलपट्टी क्षेत्र के सुरखाल पाठक गांव की दूरी तहसील मुख्यालय से 12 किलोमीटर है। सड़क नहीं बनी तो क्षेत्र दुर्गम होने के कारण उपेक्षित रह गया। उच्च शिक्षा तो दूर यहां के बच्चों को जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए भी मीलों की दूरी तय करनी पड़ती है। छात्र-छात्राओं का अधिकांश समय यह पैदल दूरी नापने में ही बीत जाता है। बैंक, पोस्ट आफिस, अस्पताल सहित अन्य कार्यों के लिए गंगोलीहाट आवाजाही करने वाले लोगों को आने-जाने में 24 किलोमीटर चलना पड़ता है।
बेलपट्टी क्षेत्र में पानी का भी गंभीर संकट
गंगोलीहाट। बेलपट्टी के चमलेख, गंतोला, तल्ला खोलिया, मल्ला खोलिया से लेकर चमडुंगरा, नाली, चहज क्षेत्र ऐसा है, जहां पानी का गंभीर संकट है। इन गांवों के लोगों ने बताया कि वर्षों से उन्हें पानी के नाम पर केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। पंपिंग योजना को स्वीकृति मिली है लेकिन यह योजना कब बनेगी और कब उनकी प्यास बुझेगी।
वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे हैं। पूरी उम्र बीत गई आज तक सड़क के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले हैं। गंगोलीहाट तक पैदल जाना पड़ता है। -लछिमा देवी।
सड़क नहीं होने से तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमारों, बुजुर्गों को डोली में ले जाना पड़ता है। बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है। - जानकी देवी।
वर्षों से सड़क की मांग की जा रही है। केवल चुनावों के समय सड़क बनाने का वादा किया जाता है। उसके बाद क्षेत्र की जनता किस हाल में है कभी सुध नहीं ली जाती है। - ललित सिंह बिष्ट।
सड़क नहीं होने से कई परिवारों ने पलायन कर लिया है। दवा लेने के लिए भी 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जरूरी सामान भी पीठ पर ही ढोकर गांव तक पहुंचाते हैं। - विक्रम सिंह बिष्ट।
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सुरखाल पाठक, चमलेख, कोलिया, गानूरा, वहेल कोर्ट, गंतोला, अनर गांव, तल्ला खोलिया और मल्ला खोलिया गांव बेलपट्टी क्षेत्र में स्थित हैं। इन गांवों में 10 हजार से अधिक की आबादी रहती है लेकिन आज तक यह गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं।
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सड़क नहीं होने से इन गांवों के लोगों को पांच से 12 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बीमार, गर्भवती, बुजुर्गों के लिए पैदल रास्तों से यह दूरी नापना आसान नहीं होता है। ऐसे में उन्हें डोली से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
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सुरखाल पाठक गांव तक सड़क निर्माण की मांग के लिए ग्रामीणों को 151 दिन तक क्रमिक अनशन और उसके बाद एक माह तक आमरण अनशन करना पड़ा। इसके बाद उन्हें सड़क निर्माण का आश्वासन मिला। वर्षों से विकास के नाम पर मिल रहे आश्वासनों के कारण दर्जनों परिवार पलायन कर चुके हैं। संवाद
बच्चों के लिए आसान नहीं है शिक्षा प्राप्त करना
गंगोलीहाट। बेलपट्टी क्षेत्र के सुरखाल पाठक गांव की दूरी तहसील मुख्यालय से 12 किलोमीटर है। सड़क नहीं बनी तो क्षेत्र दुर्गम होने के कारण उपेक्षित रह गया। उच्च शिक्षा तो दूर यहां के बच्चों को जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए भी मीलों की दूरी तय करनी पड़ती है। छात्र-छात्राओं का अधिकांश समय यह पैदल दूरी नापने में ही बीत जाता है। बैंक, पोस्ट आफिस, अस्पताल सहित अन्य कार्यों के लिए गंगोलीहाट आवाजाही करने वाले लोगों को आने-जाने में 24 किलोमीटर चलना पड़ता है।
बेलपट्टी क्षेत्र में पानी का भी गंभीर संकट
गंगोलीहाट। बेलपट्टी के चमलेख, गंतोला, तल्ला खोलिया, मल्ला खोलिया से लेकर चमडुंगरा, नाली, चहज क्षेत्र ऐसा है, जहां पानी का गंभीर संकट है। इन गांवों के लोगों ने बताया कि वर्षों से उन्हें पानी के नाम पर केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। पंपिंग योजना को स्वीकृति मिली है लेकिन यह योजना कब बनेगी और कब उनकी प्यास बुझेगी।
वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे हैं। पूरी उम्र बीत गई आज तक सड़क के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले हैं। गंगोलीहाट तक पैदल जाना पड़ता है। -लछिमा देवी।
सड़क नहीं होने से तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमारों, बुजुर्गों को डोली में ले जाना पड़ता है। बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है। - जानकी देवी।
वर्षों से सड़क की मांग की जा रही है। केवल चुनावों के समय सड़क बनाने का वादा किया जाता है। उसके बाद क्षेत्र की जनता किस हाल में है कभी सुध नहीं ली जाती है। - ललित सिंह बिष्ट।
सड़क नहीं होने से कई परिवारों ने पलायन कर लिया है। दवा लेने के लिए भी 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जरूरी सामान भी पीठ पर ही ढोकर गांव तक पहुंचाते हैं। - विक्रम सिंह बिष्ट।