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कुमाऊं रायफल्स के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम शुरू 

Mon, 05 Dec 2016 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Mon, 05 Dec 2016 10:41 PM IST
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Kumaon Rifles launched the centenary year of the program
कुमाऊं रायफल्स के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम शुरू  - फोटो : अमर उजाला
23 अक्तूबर 1917 को खड़ी हुई कुमाऊं रायफल्स के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम सोमवार से शुरू हो गए हैं। अक्तूबर 2017 तक विभिन्न कार्यक्रम जारी रहेंगे। 3 कुमाऊं रायफल्स सबसे पुरानी फौज है। पहले इसका नाम 1 कुमाऊं रायफल्स था। यहां छावनी क्षेत्र में 3 कुमाऊं रायफल्स में आयोजित सैन्य दरबार में रिटायर्ड मेजर जनरल आरके कौशल ने कुमाऊं रायफल्स की स्थापना के उद्देश्य, इतिहास की विस्तार से जानकारी दी। 3 कुमाऊं रायफल्स ऐसी फौज है जिसमें सारे सैनिक कुमाऊंनी ही हैं।
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मेजर जनरल (रि) कौशल ने बताया कि कुमाऊं रेजीमेंट ने भारतीय सेना को तीन सेनाध्यक्ष दिए। युद्ध के मैदान में अद्भुत वीरता दिखाने वाली इस फौज ने 2 परमवीर चक्र और 5 अशोक चक्र और बहादुरी के कई तमगे हासिल किए। 1917 से पहले कुमाऊं के नाम से भारतीय सेना में कोई फौज नहीं थी। तब तक कुमाऊं के जवान गोरखा रायफल्स, गढ़वाल रायफल्स, वर्मा पुलिस तथा सेना की अन्य यूनिटों में भर्ती होते थे। 23 अक्तूबर 1917 को लेफ्टिनेंट कर्नल ईएम लैंग ने कुमाऊं रायफल्स को स्थापना की। इस फौज का ध्वज अल्मोड़ा के निकट सितौली में फहराया गया। 15 नवंबर 1917 को इस फौज का नाम बदलकर 4/39 कुमाऊं रायफल्स रखा गया। 30 अप्रैल 1918 को फिर इसका नाम बदलकर 1/50 कुमाऊं रायफल्स किया गया। 1922 में यह फौज 1 कुमाऊं रायफल्स के नाम से जानी जाने लगी। 1 कुमाऊं रायफल्स ही वर्तमान 3 कुमाऊं रायफल्स है।
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कुमाऊं रायफल्स की वीरगाथा के बारे में बताया गया कि स्थापना के छह माह के भीतर ही पाया गया कि यह नई फौज पुरानी फौजों के मुकाबले कहीं पर कम नहीं है। कुमाऊं रायफल्स को प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फिलिस्तीन भेजा गया। कुमाऊं के जांबाजों ने जय कालिका माता के उद्घोष के साथ दुश्मनों का सफाया किया था। मेजर जनरल कौशल कहते हैं कि इस फौज ने तुर्की सेना के भी छक्के छुड़ाए थे। इसी वीरता के लिए इस फौज को बैटल ऑनर प्लेस्टाइन मेग्डीडो सम्मान से नवाजा गया। वह कहते हैं कि इस फौज पर कालिका माता की अपार कृपा है। उन्होंने इस गौरवशाली वर्ष में कुमाऊं के लोगों से अपील की है कि इसे उल्लास और जोश के साथ मनाएं और अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाएं। 
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फोटो 05 पीटीएच 07 पी

अमर उजाला के सहयोग की सराहना
रिटायर्ड मेजर जनरल आरके कौशल ने सैनिकों की गतिविधियों को निरंतर प्रकाशित करने के लिए अमर उजाला की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि शताब्दी वर्ष में अमर उजाला ही कुमाऊं रायफल्स के कार्यक्रमों को जनता के सामने लाने में मदद करेगा। उन्होंने 3 कुमाऊं रायफल्स के कमान अधिकारी तथा अधीनस्थ अधिकारियों से कहा कि समय समय पर अमर उजाला को गतिविधियों की जानकारी दें।


सैनिकों के लिए अनुशासन बेहद जरूरी
 मेजर जनरल (रि) कौशल ने सेना के अफसरों, जेसीओ, सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहले सेना में अनुशासन जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं रायफल्स ने जिस वीर परंपरा को स्थापित किया था उसे निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष में सैनिकों को और जोश के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना होगा।
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