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धारचूला के जुम्मा गांव में बादल फटा
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
Updated Sun, 18 Sep 2016 10:28 PM IST
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धारचूला के जुम्मा गांव में बादल फटा
- फोटो : अमर उजाला
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जुम्मा गांव में शनिवार रात बादल फटने से भारी तबाही मची है। गांव को जोड़ने वाले छह पैदल पुल बह गए। नालों के उफान में छह घराट भी बह गए। जुम्मा गांव में आठ परिवारों की 60 मवेशियां बारिश की भेंट चढ़ गई। पूरे गांव में दहशत का माहौल है। राजस्व विभाग की टीम ने सूचना मिलते ही रविवार को गांव का दौरा किया। पूरे इलाके में हालात बेहद खतरनाक बने हैं। जुम्मा ग्राम पंचायत के छह गांवों के सैकड़ों परिवार प्रभावित हो गए हैं। जुम्मा गांव 1989 से लगातार भूस्खलन के हादसे झेल रहा है।
तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जुम्मा गांव में शनिवार आधी रात के बाद करीब 12.30 बजे तेज गरज के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। गांव के पास बहने वाले कुलाघाट नाले का रुख पलट गया और नाले ने विकराल रूप ले लिया। नाले का सारा पानी तेज गति से गांव की ओर आ गया। पानी के तेज बहाव के साथ स्यांबगड़, तल्ला कुलाघाट, मल्ला कुलाघाट, सल्याड़ी और खातपोली को जोड़ने वाले छह पैदल पुल बह गए। गांव के पीछे की पहाड़ी में हुए भूस्खलन के साथ निकले बड़े बड़े बोल्डर गांव की सीमा तक आ गए। भूस्खलन के कारण धरती हिलने लगी और घबराहट में लोग घरों से बाहर निकलकर पेड़ों की आड़ में बैठे रहे। पूरी रात लोगों को दहशत में गुजारनी पड़ी। यह मंजर करीब एक घंटे तक चला।
घटना की सूचना मिलते ही आज सुबह तहसीलदार आईबी मल्ल, खंड विकास अधिकारी एलडी जोशी, जुम्मा के पटवारी नंदलाल, ग्राम पंचायत अधिकारी दीपक कुमार ने जुम्मा जाकर स्थिति की जानकारी ली। तहसीलदार ने बताया कि जुम्मा में हालात काफी खराब हो गए हैं। उन्होंने लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य बिशन सिंह धामी, सोहन सिंह बिष्ट तथा ग्राम प्रधान राजेंद्री देवी ने कहा कि बादल फटने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। जानवरों के बहने से लोगों को भारी क्षति पहुंची है। उन्होंने बताया कि जुम्मा ग्राम पंचायत के जामुनी तोक के 40 परिवार, खातपोली के 30 परिवार, तुसदानी के 20 परिवार, रैजानी के 30 परिवार, नालपानी के 12 परिवार और नाग के 80 परिवार इस तबाही की चपेट में आए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरा इलाका छिन्न भिन्न हो गया है। गांव रहने लायक नहीं है।
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इस मौसम में खंड वृष्टि की संभावना
धारचूला। मौसम विभाग का कहना है कि इस मौसम में एक ही स्थान पर खंडवृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। यदि बादलों का सर्कलेशन एक ही स्थान पर हो जाए तो बादल फटने की संभावना बढ़ जाती है। स्थानीय भौगोलिक स्थिति और नमी के कारण भी इस तरह की घटनाएं होती हैं।
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तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जुम्मा गांव में शनिवार आधी रात के बाद करीब 12.30 बजे तेज गरज के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। गांव के पास बहने वाले कुलाघाट नाले का रुख पलट गया और नाले ने विकराल रूप ले लिया। नाले का सारा पानी तेज गति से गांव की ओर आ गया। पानी के तेज बहाव के साथ स्यांबगड़, तल्ला कुलाघाट, मल्ला कुलाघाट, सल्याड़ी और खातपोली को जोड़ने वाले छह पैदल पुल बह गए। गांव के पीछे की पहाड़ी में हुए भूस्खलन के साथ निकले बड़े बड़े बोल्डर गांव की सीमा तक आ गए। भूस्खलन के कारण धरती हिलने लगी और घबराहट में लोग घरों से बाहर निकलकर पेड़ों की आड़ में बैठे रहे। पूरी रात लोगों को दहशत में गुजारनी पड़ी। यह मंजर करीब एक घंटे तक चला।
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घटना की सूचना मिलते ही आज सुबह तहसीलदार आईबी मल्ल, खंड विकास अधिकारी एलडी जोशी, जुम्मा के पटवारी नंदलाल, ग्राम पंचायत अधिकारी दीपक कुमार ने जुम्मा जाकर स्थिति की जानकारी ली। तहसीलदार ने बताया कि जुम्मा में हालात काफी खराब हो गए हैं। उन्होंने लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य बिशन सिंह धामी, सोहन सिंह बिष्ट तथा ग्राम प्रधान राजेंद्री देवी ने कहा कि बादल फटने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। जानवरों के बहने से लोगों को भारी क्षति पहुंची है। उन्होंने बताया कि जुम्मा ग्राम पंचायत के जामुनी तोक के 40 परिवार, खातपोली के 30 परिवार, तुसदानी के 20 परिवार, रैजानी के 30 परिवार, नालपानी के 12 परिवार और नाग के 80 परिवार इस तबाही की चपेट में आए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरा इलाका छिन्न भिन्न हो गया है। गांव रहने लायक नहीं है।
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इस मौसम में खंड वृष्टि की संभावना
धारचूला। मौसम विभाग का कहना है कि इस मौसम में एक ही स्थान पर खंडवृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। यदि बादलों का सर्कलेशन एक ही स्थान पर हो जाए तो बादल फटने की संभावना बढ़ जाती है। स्थानीय भौगोलिक स्थिति और नमी के कारण भी इस तरह की घटनाएं होती हैं।