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मैकेनिकल के छात्रों ने पुरानी बाइक के पुर्जों से बनाई क्वाड मड बाइक
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पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने पुरानी बाइकों के कलपुर्जों से क्वाड मड बाइक बनाई है। उन्हें बाइक बनाने में दो माह का समय लगा। बाइक मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से चलाई जा सकती है। छात्रों का दावा है कि यह बाइक चार धाम और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
दो सीटर बाइक के लिए पल्सर 150 के 2003-04 मॉडल का इंजन लगाया गया है। बाइक की बॉडी का कुछ हिस्सा 220 पल्सर का कुछ छात्रों ने खुद ही डिजाइन किया है। बाइक के अगले भाग में पल्सर के सस्पेंशन और पिछले भाग में केटीएम बाइक के सस्पेंशनों का इस्तेमाल किया गया है। पांच गियर वाली बाइक सेल्फ और किक मोड में शुरू हो सकती है। छात्रों ने इस बाइक को बनाने में खुद की 10 हजार की राशि खर्च की है। बाइक की भार क्षमता 150 किग्रा की है। इसमें दो लोगों के साथ ही भारी भरकम सामन भी ले जाया जा सकता है। जगदीपक पटवाल, प्रदीप जोशी, इशिका जोशी ने बाइक निर्माण किया जबकि बाइक में वायरिंग अभिषेक जोशी, त्रिवेंद्र नेगी के साथ ही प्रो. मुन्ना सिंह, देवनिधि, नितेश वर्मा, कुंदन सिंह, तरु माहरा, भूपेंद्र भारती ने बाइक निर्माण में मदद की।
यह बाइक बनाने में दो माह का समय लगा। बाइक बनाने में मेकेनिकल विभाग के शिक्षक, छात्रों और इलेक्ट्रिकल विभाग के कई छात्रों की मदद ली गई है। एक पुरानी पल्सर को लगातार देखते आ रहा था। विचार आया कि इसके कलपुर्जों को नया जीवन देकर एक बाइक का निर्माण किया जाए। - सुक्रित ध्यानी, टीम लीडर।
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मेकेनिकल के छात्रों ने क्वाड मड बाइक बनाकर नया आविष्कार किया है। पुरानी बाइक के कलपुर्जों को नया रूप देकर बनाई गई यह बाइक मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्र में आसानी से दौड़ सकती है। हालांकि बाइक को थोड़ा और मोडिफाई करना है। इसका ट्रायल सफल रहा है। - देवनिधि ध्यानी, एचओडी मेकेनिकल।
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दो सीटर बाइक के लिए पल्सर 150 के 2003-04 मॉडल का इंजन लगाया गया है। बाइक की बॉडी का कुछ हिस्सा 220 पल्सर का कुछ छात्रों ने खुद ही डिजाइन किया है। बाइक के अगले भाग में पल्सर के सस्पेंशन और पिछले भाग में केटीएम बाइक के सस्पेंशनों का इस्तेमाल किया गया है। पांच गियर वाली बाइक सेल्फ और किक मोड में शुरू हो सकती है। छात्रों ने इस बाइक को बनाने में खुद की 10 हजार की राशि खर्च की है। बाइक की भार क्षमता 150 किग्रा की है। इसमें दो लोगों के साथ ही भारी भरकम सामन भी ले जाया जा सकता है। जगदीपक पटवाल, प्रदीप जोशी, इशिका जोशी ने बाइक निर्माण किया जबकि बाइक में वायरिंग अभिषेक जोशी, त्रिवेंद्र नेगी के साथ ही प्रो. मुन्ना सिंह, देवनिधि, नितेश वर्मा, कुंदन सिंह, तरु माहरा, भूपेंद्र भारती ने बाइक निर्माण में मदद की।
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यह बाइक बनाने में दो माह का समय लगा। बाइक बनाने में मेकेनिकल विभाग के शिक्षक, छात्रों और इलेक्ट्रिकल विभाग के कई छात्रों की मदद ली गई है। एक पुरानी पल्सर को लगातार देखते आ रहा था। विचार आया कि इसके कलपुर्जों को नया जीवन देकर एक बाइक का निर्माण किया जाए। - सुक्रित ध्यानी, टीम लीडर।
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मेकेनिकल के छात्रों ने क्वाड मड बाइक बनाकर नया आविष्कार किया है। पुरानी बाइक के कलपुर्जों को नया रूप देकर बनाई गई यह बाइक मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्र में आसानी से दौड़ सकती है। हालांकि बाइक को थोड़ा और मोडिफाई करना है। इसका ट्रायल सफल रहा है। - देवनिधि ध्यानी, एचओडी मेकेनिकल।