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झूलाघाट में इंडो नेपाल मैत्री पार्क बनाया जाए
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झूलाघाट के इसी स्थान पर इंडो-नेपाल मैत्री पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं ग्रामीण।
- फोटो : PITHORAGARH
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। भारत-नेपाल सीमा और जिला मुख्यालय से नेपाल की सबसे नजदीक कस्बे झूलाघाट में पर्यटकों और दोनों देशों के नागरिकों के लिए इंडो नेपाल मैत्री पार्क बनाने की मांग तेज हो गई है। महाकाली की आवाज संगठन सहित कई अन्य स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार से झूलाघाट एसएसबी कैंप के ऊपर मैत्री पार्क बनाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि झूलाघाट में पर्यटकों के लिए विदेश भ्रमण के अलावा कोई भी ऐसा स्थान नहीं बना है जहां वह सुकून से रह सकें। पर्यटकों के लिए मजिरकांडा वन पंचायत की पेड़ों से घिरी खूबसूरत जगह है। जहां पर इंडो-नेपाल मैत्री पार्क के निर्माण होना चाहिए। इस स्थान पर स्थानीय युवा सेना, पुलिस आदि भर्तियों की तैयारी भी करते हैं।
संगठन के शंकर खड़ायत का कहना है कि एसएसबी कैंप के पास मैत्री पार्क बनाने के लिए डीएम, डीएफओ और पर्यटन विभाग को पत्र भेजा था। डीएफओ ने मामला रेंजर को दे दिया है। रेंजर दिनेश जोशी का कहना है कि मैत्री पार्क जिस स्थान पर बनाने की मांग हो रही है उस स्थान पर मौजूद जंगल सिविल है या ग्राम पंचायत का ये पता नहीं है। इसे लेकर तहसील और वन विभाग की संयुक्त कमेटी बैठक करेगी।
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मजिरकांडा के सरपंच चंद्रशेखर भट्ट का कहना है कि जिस स्थान पर मैत्री पार्क बनाने की मांग हो रही है। वह जंगल सिविल वन के अंदर आता है। पंचेश्वर बाध निर्माण को लेकर यहां पर पेड़ों की गणना भी हुई थी। रेंजर जोशी का कहना है कि सिविल वन को डी-फारेस्ट में डालने में समय लगता है इसके लिए अनापत्ति लेनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि इंडो-नेपाल मैत्री पार्क बनने से दोनों देशों के संबंधों में सुधार होंगे। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां भी बढे़ंगी।
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लोगों का कहना है कि झूलाघाट में पर्यटकों के लिए विदेश भ्रमण के अलावा कोई भी ऐसा स्थान नहीं बना है जहां वह सुकून से रह सकें। पर्यटकों के लिए मजिरकांडा वन पंचायत की पेड़ों से घिरी खूबसूरत जगह है। जहां पर इंडो-नेपाल मैत्री पार्क के निर्माण होना चाहिए। इस स्थान पर स्थानीय युवा सेना, पुलिस आदि भर्तियों की तैयारी भी करते हैं।
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संगठन के शंकर खड़ायत का कहना है कि एसएसबी कैंप के पास मैत्री पार्क बनाने के लिए डीएम, डीएफओ और पर्यटन विभाग को पत्र भेजा था। डीएफओ ने मामला रेंजर को दे दिया है। रेंजर दिनेश जोशी का कहना है कि मैत्री पार्क जिस स्थान पर बनाने की मांग हो रही है उस स्थान पर मौजूद जंगल सिविल है या ग्राम पंचायत का ये पता नहीं है। इसे लेकर तहसील और वन विभाग की संयुक्त कमेटी बैठक करेगी।
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मजिरकांडा के सरपंच चंद्रशेखर भट्ट का कहना है कि जिस स्थान पर मैत्री पार्क बनाने की मांग हो रही है। वह जंगल सिविल वन के अंदर आता है। पंचेश्वर बाध निर्माण को लेकर यहां पर पेड़ों की गणना भी हुई थी। रेंजर जोशी का कहना है कि सिविल वन को डी-फारेस्ट में डालने में समय लगता है इसके लिए अनापत्ति लेनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि इंडो-नेपाल मैत्री पार्क बनने से दोनों देशों के संबंधों में सुधार होंगे। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां भी बढे़ंगी।