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Pithoragarh News: टनकपुर रोडवेज डिपो पर बढ़ा दबाव, झूलाघाट-मुनस्यारी रूट बंद
Sun, 19 Jul 2026 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 19 Jul 2026 10:50 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। कुमाऊं का प्रमुख टनकपुर रोडवेज डिपो इन दिनों नई बसों की भारी किल्लत से जूझ रहा है। पर्याप्त बसें न होने के कारण डिपो को झूलाघाट और मुनस्यारी जैसे कई महत्वपूर्ण पर्वतीय रूटों पर बस सेवा को पूरी तरह बंद करना पड़ा है जबकि प्रमुख पर्यटन नगरी नैनीताल के लिए भी वर्तमान में केवल एक ही बस का संचालन हो पा रहा है।
टनकपुर डिपो कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों का प्रमुख प्रवेश द्वार होने के कारण पहाड़ और मैदान के अनेक महत्वपूर्ण मार्गों पर बसों का संचालन करता है। वर्तमान में डिपो के बेड़े में 103 निगम की बसें हैं जबकि कुछ अनुबंधित बसें भी संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद यात्रियों की बढ़ती मांग के अनुरूप बसों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
रोडवेज प्रबंधन लंबे समय से नए वाहनों की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर पर्वतीय क्षेत्रों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई पुराने वाहन अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं, जिन्हें पहाड़ी मार्गों से हटाकर मैदान के रूटों पर चलाया जा रहा है। फिलहाल नई बसों की आपूर्ति कब होगी, इसे लेकर रोडवेज प्रबंधन के पास भी कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं है। ऐसे में यात्रियों को सीमित बस सेवाओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जबकि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन की मांग लगातार बढ़ रही है।
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जरूरत के अनुसार सेवाएं होंगी शुरू
मंडलीय प्रबंधक आलोक कुमार बनवाल ने बताया कि जून माह में ही पहाड़ी मार्गों के लिए 30 और मैदानी मार्गों के लिए 20 नई बसों की मांग शासन को भेजी गई है। नई बसें मिलने के बाद ही बंद पड़े रूटों पर दोबारा संचालन शुरू किया जा सकेगा और जरूरत के अनुसार नए मार्गों पर भी सेवाएं शुरू होंगी।
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टनकपुर डिपो कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों का प्रमुख प्रवेश द्वार होने के कारण पहाड़ और मैदान के अनेक महत्वपूर्ण मार्गों पर बसों का संचालन करता है। वर्तमान में डिपो के बेड़े में 103 निगम की बसें हैं जबकि कुछ अनुबंधित बसें भी संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद यात्रियों की बढ़ती मांग के अनुरूप बसों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
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रोडवेज प्रबंधन लंबे समय से नए वाहनों की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक पर्याप्त बसें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर पर्वतीय क्षेत्रों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई पुराने वाहन अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं, जिन्हें पहाड़ी मार्गों से हटाकर मैदान के रूटों पर चलाया जा रहा है। फिलहाल नई बसों की आपूर्ति कब होगी, इसे लेकर रोडवेज प्रबंधन के पास भी कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं है। ऐसे में यात्रियों को सीमित बस सेवाओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जबकि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन की मांग लगातार बढ़ रही है।
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जरूरत के अनुसार सेवाएं होंगी शुरू
मंडलीय प्रबंधक आलोक कुमार बनवाल ने बताया कि जून माह में ही पहाड़ी मार्गों के लिए 30 और मैदानी मार्गों के लिए 20 नई बसों की मांग शासन को भेजी गई है। नई बसें मिलने के बाद ही बंद पड़े रूटों पर दोबारा संचालन शुरू किया जा सकेगा और जरूरत के अनुसार नए मार्गों पर भी सेवाएं शुरू होंगी।